10. अल्पसंख्यक समिति - Page 192

अल्पसंख्यक समिति

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वर्ग या समुदाय है, जिनमें अब तक एक-दूसरे के साथ झगड़े होते रहते हैं, तब उन्हें अपनी दिक्कतों को जल्दी दूर कर लेना चाहिए। आम सहमति के लिए यह पहला कदम होगा - बहुत ही महत्त्वपूर्ण और आवश्यक कदम - और यह सहमति आम होगी।

डॉ. अम्बेडकरः मैंने अपनी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।

अध्यक्षः डॉ. अम्बेडकर की स्थिति पूरी तरह स्प्ष्ट हो चुकी है, उन्होंने अपने अनोखे अंदाज से इस बारे में शक-शुबहा को दूर कर दिया है। जब यह संस्थान पुनः विचार-विमर्श करेगी, तब हम इसे लेंगे। मैं आप सब लोगों से यह चाहता हूं कि आप सब यह अनुमति करें कि हम लोग आम सहमति के लिए एक दूसरे के साथ सहयोग कर रहे हैं। यह समझौता किन्हीं दो या तीन पक्षों के बीच नहीं, बल्कि पूरी सहमति से होगा।

डॉ. अम्बेडकरऽः मेरा यह सुझाव है कि कृपया आप कांग्रेस के प्रतिनिधियों के अलावा अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक छोटी सी समिति बनाने पर विचार करने की कृपा करें, जो स्थगन की अवधि के दौरान औपचारिक रूप से मिलेगी और इस समस्या पर विचार करेगी।

अध्यक्षः मैं भी यही सुझाव देने वाला था। आप मुझसे यह समिति बनाने के लिए न कहें, आप स्वयं बना लें। मैंने आपको यहां जलपान के लिए आमंत्रित किया है। आप लोग इस विषय पर खुद एक अनौपचारिक बैठक पर विचार क्यों नहीं कर लेते और तब तक जब आप कुछ कहेंगे तब आप यह सोचकर कहेंगे कि आपके कहने का दूसरे पर क्या असर पड़ रहा है।

डॉ. अम्बेडकरः जैसी आपकी इच्छा।

अध्यक्षः यह कहीं अच्छा होगा।

आठवीं बैठक - 1 अक्तूबर 1931

श्री गांधीऽऽः प्रधानमंत्री जी! कल रात माननीय आगा खां और दूसरे अन्य मुसलमान दोस्तों के साथ बातचीत के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे कि जिस काम के लिए हम सब यहां इकट्टòा हुए हैं, उसके हित में एक सप्ताह के लिए बैठक स्थगित करने का अनुरोध करना उचित होगा। मुझे अपने अन्य सहयोगियों के साथ राय-मशविरा करने का मौका नहीं मिला है। लेकिन मेरा ख्याल है कि वह मेरे इस सुझाव को, जो मैं दे रहा हूं, स्वीकार करेंगे। मैं अपने मुसलमान दोस्तों के साथ बड़ी बेताबी से बातचीत कर रहा हूं। मुझे कल दोपहर में कुछ और दोस्तों के साथ बातचीत करने का मौका मिला, जो जुदा-जुदा वर्गों और समुदायों के थे। हम लोग कोई ज्यादा सफल नहीं हुए और उनकी राय भी यही थी कि जितना वक्त हमारे पास है, वह बातचीत के लिए बहुत थोड़ा है।