176 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मैं अपने बारे में तो कह सकता हूं कि इस एक हफते के बाद आगे स्थगन के लिए मैं न ही कहूंगा और इस हफते मैं जो कुछ कोशिश कर सकूंगा उसकी रिपोर्ट इस समिति को दे दूंगा।
मैं इस समिति को बताना चाहता हूं कि माननीय आगा खां और दूसरे दोस्तों ने जिनके साथ मैंने कल रात बातचीत की, उन्होंने विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों को एक साथ बुलाने और विचार विमर्श करने का काम मुझे सौंपा है, जिससे कोई पक्का समझौता किया जा सके। अध्यक्ष जी! अगर मेरा यह प्रस्ताव आपको और इस कमेटी के बाकी सदस्यों को अच्छा लगेगा, तो यह मेरी खुश-किस्मती होगी। मुझे विश्वास है कि हिज हाइनेस इस प्रस्ताव का अनुमोदन करेंगे। हमें उम्मीद है कि इस हफते के आखिर तक हम किसी समझौते की सूचना आपको दे देंगे।
अब मैं यह उम्मीद जाहिर कर रहा हूं, मैं आपको ऐसा कोई भरोसा नहीं देना चाहता। चूंकि मैं विश्वास व्यक्त कर रहा हूं, इसलिए कोई ऐसी बात जरूरी है, जिसके आधार पर मैं यह उम्मीद जाहिर कर रहा हूं। मैं अदम्य अशावादी हूं। मेरी जिंदगी में जब कभी चारों ओर अंधेरा दिखाई पड़ने लगा है, तब कुछ न कुछ ऐसी बात जरूर हुई है, जिसने मुझे उम्मीद दिलाई है। जो भी हो, जहां तक आदमी की कोशिश करने की बात है, पूरी कोशिश की जाएगी। मुझे कोई शक नहीं, इस कमेटी के बहुत से मेम्बरान किसी न किसी समझौते पर जरूर पहुंचेंगे।
इन शब्दों के साथ, मैं आज की बैठक को स्थगित करने का अपना प्रस्ताव आपके सम्मुख विचारार्थ पेश करता हूं।
माननीय आगा खांः मैं इस प्रस्ताव का सहर्ष अनुमोदन करता हूं।
सरदार उज्ज्वल सिंहः मैं इस प्रस्ताव का हृदय से समर्थन करता हूं। मैं भी आशा करता हूं कि अगर दोनों ओर सद्भावना बनी रही तब हम किसी न किसी समझौते पर अवश्य पहुंच जाएंगे।
डॉ. अम्बेडकरः यह समिति जिस समस्या पर विचार कर रही है, उसका हल निकालने के हम जो हर संभव प्रयत्न कर रहे हैं, उसके रास्ते में मैं कोई अड़चन नहीं पैदा करना चाहता। जो तरीका श्री गांधी ने बताया, अगर उससे कोई हल निकल सकता हो, तो मुझे इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन सिर्फ एक दिक्कत है, जो मेरे सामने, दलित वर्ग का प्रतिनिधि होने के नाते है। मैं नहीं जानता कि स्थगन की इस अवधि में इस प्रश्न पर विचार करने के लिए श्री गांधी किस तरह की कमेटी बना रहे हैं, लेकिन मेरा ख्याल है कि इस कमेटी में दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व रखा जाएगा।
श्री गांधीः बिना शक।