अल्पसंख्यक समिति
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को कुछ गलत समझने के फलस्वरूप है। यदि इस स्पष्टीकरण के बाद जिसे मैंने प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, इस समिति की कार्यवाही को एक सप्ताह के लिए स्थगित करने के बारे में कोई सर्वसम्मत निर्णय हो जाता है, जिससे कि हम लोग आपस में दोस्ती के वातावरण में, परस्पर सहयोग के वातावरण में, अपनी मातृभूमि की शांतिपूर्ण प्रगति के एक सच्चे शुभेच्छु के रूप में मिल सकें तो मुझे बेहद खुशी होगी।
श्रीमती नायडूः प्रधानमंत्री जी! चूंकि मैं न तो अल्पसंख्यक वर्ग की हूं, न किसी विशेष वर्ग की हूं, इसलिए मैं बिना किसी स्वार्थ के अल्पसंख्यकों और विशेष वर्ग के लोगों से यह अपील करती हूं कि वे दिक्कतें पैदा न करें और जब तक कोई दिक्कत उनके सामने न आए, तब तक वे उनकी शंका भी न करें। महोदय! आपने जो कुछ कल कहा था, वह इसी अपील का ही एक दूसरा रूप था। यह हमारे आत्म-सम्मान का प्रश्न है, एक कर्तव्य की भावना है कि हम बाहरी विवाचन या हस्तक्षेप के बिना अपनी घरेलू समस्या खुद निबटा लें। मैं इसीलिए अपील करती हूं कि हमें अपने घरेलू झगड़े, अगर कोई हैं, तो खुद सुलझाने चाहिए और वह आपको अपने समझौते की सूचना दे दें, जो सभी को मान्य और संतोषप्रद हो। मैं सोचती हूं कि महात्मा गांधी ने इसी वजह से बैठक स्थगित करने का प्रस्ताव रखा है। मैं नहीं समझती कि किसी भी अल्पसंख्यक वर्ग को, जो चाहे जितना भी छोटा क्यों न हो, इससे डरने की कोई जरूरत है। प्रत्येक अल्पसंख्यक वर्ग हमारे देश का वैसा ही एक भाग है, जैसे कि कोई बहुसंख्यक वर्ग। मैं यूरोप के एक सर्वोच्च राजनेता की बात दुहराना चाहती हूं, जिन्होंने गर्व के साथ यह कहा था कि उसने एक स्वतंत्र राष्ट्र का निर्माण बिना किसी फौज और बिना किसी धन के किया था। उन्होंने दो वर्ष पूर्व मुझसे कहा था, ‘बहन! अपने यहां अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को खुश रखो। जब तक तुम अपने अल्पसंख्यकों के दिल में सुरक्षा की भावना पैदा नहीं कर सकोगी, तब तक तुम किसी भी राष्ट्र का निर्माण नहीं कर सकोगी।’ चूंकि हम अल्पसंख्यकों में सुरक्षा की यह भावना पैदा करना चाहते हैं और चाहते हैं कि वह अपने को इस देश का अभिन्न अंग समझें, जिसका बहुसंख्यक वर्ग महात्मा गांधी और अल्पसंख्यक वर्ग माननीय आगा खां के द्वारा यह अपील करता है कि हम अपने छोटे-छोटे झगड़े उनके सामने नहीं रखेंगे, जिनका उनसे कोई संबंध नहीं है, बल्कि हम औचित्य, उदारता एवं उदात्तता के आधार पर जो न्याय है और आत्म-सम्मान की भावना से जिसके कारण हम बाहर के लोगों को अपने घर के झगड़ों को जानने नहीं देते, खुद सुलझा लेंगे। प्रधानमंत्री जी! यह मेरी अपील है और मुझे विश्वास है कि बहुसंख्यक तथा अल्पसंख्यक वर्गों के जो लोग यहां उपस्थित हैं, वे इसे स्वीकार कर लेंगे।
डॉ. अम्बेडकरः मैं अपनी स्थिति को स्पष्ट करना चाहता हूं। लगता है कि मैंने जो कुछ कहा, उसके बारे में कुछ गलतफहमी है। मैं स्थगन का विरोध नहीं कर रहा हूं, न मुझे किसी समिति में काम करने में कोई एतराज है, जो इस सवाल पर विचार करने के लिए बनाई जाएगी। इस समिति में शामिल होने के पहले, अगर वह यह सौभाग्य