10. अल्पसंख्यक समिति - Page 198

अल्पसंख्यक समिति

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है कि आप मेरे विचारों को स्वीकार या अस्वीकार करें। इसलिए कृपया अपने दिल से सारी शंकाएं दूर कर दें और यह ख्याल ही न लाएं कि मैंने कांफ्रेंस या अनौपचारिक बैठक की योजना बनाई है, उसमें सारे लोग किसी भी धारा में बह जाएं। लेकिन अगर आप समझते हैं कि कुर्सियां पकड़ कर बैठने के बजाए एक-दूसरे के नजदीक आने का यह एक तरीका हो सकता है, तब आप न सिर्फ स्थगन प्रस्ताव का समर्थन करेंगे, बल्कि उस प्रस्ताव पर भी अपना-अपना पूरा-पूरा सहयोग देंगे, जो मैंने इन अनौपचारिक बैठकों के बारे में रखा है।

माननीय ह्यूबर्ट कारः प्रधानमंत्री जी! मेरे समुदाय का जिक्र नहीं किया गया है। यह बहुत ही छोटा-सा समुदाय है। लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि हम इस स्थगन का या किसी भी दूसरे उपाय का स्वागत करते हैं, जिससे उस मसले को हल करने में सहायता मिले, जिसे हम अन्य मसलों से पहले हल करना जरूरी समझते हैं और जिसमें हम सबकी गहरी दिलचस्पी है।

डॉ. दत्तः मैं इस स्थगन का स्वागत करता हूं।

अध्यक्षः तब मैं इसे स्वीकार करता हूं। मित्रों! मैं यह बात इस शर्त पर स्वीकार कर रहा हूं कि हम समय नहीं गवाएंगे और ये कांफ्रेंस, जिन्हें श्री गांधी अनौपचारिक कांफ्रेंस कहते हैं, मैं आशा करता हूं कि ये कांफ्रेंस अत्यंत महत्त्वपूर्ण और लाभप्रद होंगे, जब तक हम दुबारा नहीं मिलते, इस बीच होंगे। मैं आशा करता हूं कि आप सब अपना समय इसी रूप में बिताएंगे।

नवीं बैठक - 8 अक्तूबर, 1931

अध्यक्षऽः जब हम पिछले बृहस्पतिवार को मिले थे, तब सबकी सहमति से हमने एक सप्ताह के लिए अपनी बैठकें इसलिए स्थगित कर दी थीं कि जिससे अनौपचारिक और गैर-सरकारी रीति से विचार-विमर्श हो सके और हम सब किसी एक निर्णय पर पहुंच सकें। हमारा पहला कार्य उन लोगों से रिपोर्ट हासिल करना है, जो इस अनौपचारिक बातचीत के सूत्रधार हैं।

श्री गांधी से अनुरोध है कि वह सबसे पहले बोलें।

श्री गांधीः प्रधानमंत्री जी और मित्रों! विभिन्न वर्ग के प्रतिनिधियों में और उनके साथ अनौपचारिक बातचीत के द्वारा सांप्रदायिक समस्या का सर्वसम्मत हल निकालने की कोशिश में अपनी असफलता की घोषणा मुझे बड़े खेद और दैन्य के साथ करनी पड़ रही है। प्रधानमंत्री जी! मैं आपसे और अन्य सहयोगियों से माफी मांगता हूं कि एक हफते का मूल्यवान समय बेकार चला गया। मुझे संतोष सिर्फ इस बात में है कि जब मैंने इस बातचीत को कराने का दायित्व लिया था, तब मुझे मालूम था कि सफलता की

ऽ प्रोसीडिंग्स ऑफ दि फेडरल स्ट्रक्चर कमेटी एंड माइनॉरिटीज कमेटी, खंड 1, पृ. 1356-58