10. अल्पसंख्यक समिति - Page 200

अल्पसंख्यक समिति

183

मैं दुहरा रहा हूं, वह यह है कि मैं आपका विशेष प्रतिनिधित्व होने के खिलाफ हूं। मैं यह अच्छी तरह मानता हूं कि इससे उन्हें कोई लाभ नहीं होगा, उल्टे ज्यादा नुकसान ही होगा। लेकिन कांग्रेस वयस्क मताधिकार के लिए कृत संकल्प है। इसलिए उनमें से लाखों लोगों के नाम मतदाताओं की सूची में आ जाएंगे। अस्पृश्यता की भावना तेजी से खत्म होती जा रही है। ऐसी स्थिति में यह असंभव सा लगता है कि इन मतदाताओं के द्वारा नामजद व्यक्तियों का दूसरे लोगों के द्वारा बायकाट किया जाएगा, लेकिन इन व्यक्तियों के लिए विधान-मंडलों में चुनकर आने की अपेक्षा सामाजिक और धार्मिक उत्पीड़न से सुरक्षा की अधिक आवश्यकता है। हमारे आचार-विचार से जो अक्सर कानून से ज्यादा शक्तिशाली हैं, उन्हें इतना गिरा दिया है कि हर समझदार हिन्दू को लज्जा का अनुभव करना चाहिए और इसके लिए पश्चाताप करना चाहिए। इसलिए मैं कठोर से कठोर कानून चाहता हूं, जिसके अधीन इस प्रकार के आचार-विचार अपराध घोषित किए जा सकें, जो श्रेष्ठ कहे जाने वाले वर्ग के लोग मेरे देश के इन निवासियों पर कर रहे हैं। ईश्वर का धन्यवाद, हिन्दुओं का विवेक जाग गया है, अस्पृश्यता की भावना अब शीघ्र ही हमारे इतिहास के एक कलंक का अवशेष बनकर रह जाएगी।

डॉ. अम्बेडकरः प्रधानमंत्री जी! पिछली रात जब हम अनौपचारिक समिति की बैठक के समाप्त होने के बाद एक-दूसरे से विदा हुए थे, तब हम असफलता की भावना के साथ एक-दूसरे से विदा हुए थे। लेकिन हम सब एक बात पर सहमत थे कि हममें से कोई भी कोई भाषण या ऐसी टिप्पणी नहीं करेगा, जिससे उत्तेजना पैदा हो। लेकिन मुझे यह देखकर दुःख हुआ कि श्री गांधी ने इस समझौते को भंग किया है। क्षमा कीजिए, मुझे भी बोलने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने शुरुआत अनौपचारिक समिति की असफलता के कारणों को जो उनके विचार से थे, बताते हुए की। अब मेरे भी कारण हैं, जो मेरे विचार से किसी समझौते पर अनौपचारिक बैठक के न पहुंचने के पीछे थे। लेकिन इन कारणों की इस समय मैं व्याख्या नहीं करना चाहता। मुझे दो बातों से दुःख हुआ है। पहली बात है कि अपने प्रस्ताव तक अर्थात् अल्पसंख्यक समिति की बैठक अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर देनी चाहिए, अपने को सीमित रखने के बजाए, उन्होंने विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों पर छींटाकशी करनी शुरू कर दी, जो इस बैठक में बैठे हुए थे। उन्होंने कहा कि ये प्रतिनिधि सरकार के नामजद लोग हैं और अपने-अपने समुदाय के दृष्टिकोण को व्यक्त नहीं कर रहे हैं, जिसके कि वे प्रतिनिधि हैं। हम सरकार के नामजद लोग हैं, इस आरोप का खंडन तो नहीं कर सकते, लेकिन मैं अपने बारे में बता रहा हूं कि मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि अगर भारत के दलित वर्ग के लोगों को इस समिति के लिए प्रतिनिधि चुनने का मौका दिया गया, तब मुझे यही स्थान मिलेगा। मैं इसलिए कहता हूं कि चाहे मैं नामजद होऊं या नहीं, मैं पूरी तरह से अपने समुदाय का प्रतिनिधि हूं। किसी को इस बारे में कोई भ्रम नहीं होना चाहिए।