10. अल्पसंख्यक समिति - Page 201

184 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री गांधी हमेशा से यह दावा करते आ रहे हैं कि कांग्रेस दलित वर्ग के लिए है और कांग्रेस दलित वर्गों का उससे ज्यादा प्रतिनिधित्व करती है, जितना मैं व मेरे साथी कर सकते हैं। इस दावे के बारे में, मैं इतना ही कह सकता हूं कि यह भी एक ऐसा दावा है, जो गैर जिम्मेदार लोग करते या किया करते हैं, हालांकि जो लोग इनसे संबंधित हैं, वे इन दावों को लगातार अस्वीकार करते रहे हैं।

मेरे पास यहां एक टेलीग्राम है, जो मुझे अभी-अभी मिला है। यह ऐसी जगह से आया है, जहां मैं कभी नहीं गया हूं। यह ऐसे व्यक्ति ने भेजा है, जिसे मैंने कभी नहीं देखा। यह अध्यक्ष, दलित वर्ग संघ, कुमाऊं, अलमोड़ा, ने भेजा है। यह जगह शायद संयुक्त प्रांत में है। इस तार में कहा गया हैः

यह सभा कांग्रेस आंदोलन में जो इस देश के भीतर और बाहर चलाया जा रहा है,

अविश्वास व्यक्त करती है और कांग्रेस के कार्यकर्त्ताओं द्वारा अपनाए गए उपायों

की निन्दा करती है।

मैं आगे नहीं पढ़ना चाहता। लेकिन मैं यह कह सकता हूं (और मेरा ख्याल है कि जब श्री गांधी अपनी स्थिति पर ध्यान देंगे, तब उन्हें सच्चाई का पता चल जाएगा) कि कांग्रेस में ऐसे लोग हो सकते हैं, जिनकी दलित वर्गों के प्रति सहानुभूति हो। लेकिन दलित वर्ग के लोग कांग्रेस में नहीं हैं। यह एक तथ्य है, जिसके लिए मैं प्रमाण प्रस्तुत करना चाहता हूं। मैं इन विवादास्पद मुद्दों में नहीं पड़ना चाहता। ये कुछ हद तक मुख्य समस्या से बाहर की बात लगते हैं। श्री गांधी ने इस समिति के सम्मुख, जो मुख्य प्रस्ताव रखा, वह यह कि अल्पसंख्यक समिति को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव के बारे में माननीय मोहम्मद शफी ने, जो दृष्टिकोण अपनाया, उससे मैं पूरी तरह सहमत हूं। लेकिन मैं इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति नहीं दे सकता। मुझे ऐसा लगता है कि अब दो ही विकल्प हैं - या तो यह कि अल्पसंख्यक समिति इस समस्या को सुलझाने और किसी संतोषप्रद हल, अगर यह संभव है, तो उसे ढूंढने के लिए अपने प्रयत्न जारी रखे और अगर यह संभव न हो, तब ब्रिटिश सरकार इस समस्या को खुद हल करने का दायित्व स्वीकार करे। हम इस समस्या को तीसरे पक्ष के विवेचन के लिए छोड़ने के लिए सहमति नहीं दे सकते, जिसमें उत्तरदायित्व की वही भावना हो, जैसी कि ब्रिटिश सरकार में उत्तरदायित्व की भावना होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री जी! मुझे एक बात स्पष्ट कर देने की अनुमति दीजिए। दलित वर्ग इसके लिए उत्सुक नहीं है, शोर नहीं मचा रहा है, उसने कोई आंदोलन नहीं छेड़ रखा है कि ब्रिटिश लोगों से सत्ता तुरंत भारतीयों को सौंपी जानी चाहिए। ब्रिटिश लोगों के खिलाफ उनकी अपनी शिकायतें हैं और मैं समझता हूं कि मैंने उनकी भावनाओं को स्पष्ट करने के लिए यह यथेष्ट रूप से व्यक्त भी कर दिया है कि हमारी ये शिकायतें वास्तविक हैं। लेकिन सच बात यह है कि दलित वर्गों के लोग राजनीतिक सत्ता का हस्तांतरण किए