187
परिशिष्ट 1ऽ
सांप्रदायिक समस्या के समाधान के लिए मुस्लिमों, दलित वर्गों, भारतीय ईसाइयों, आंग्ल भारतीयों और यूरोपियनों द्वारा संयुक्त रूप
से प्रस्तुत मांग-पत्र
अल्पसंख्यक वर्गों की मांगें
सार्वजनिक नौकरियों, अधिकार व प्रतिष्ठा वाले ऊंचे पदों या नागरिक अधिकारों के उपयोग और व्यापार या व्यवसाय के मामले में किसी भी व्यक्ति के साथ उसके जन्म, धर्म, जाति या वंश के कारण कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।
किसी भी समुदाय को प्रभावित करने वाले भेदभाव युक्त कानून से संरक्षण के लिए संविधान में कानूनी सुरक्षात्मक उपायों का प्रावधान किया जाएगा।
सभी समुदायों को धार्मिक स्वतंत्रता अर्थात् किसी भी मत में आस्था रखने, पूजा-पाठ करने, प्रचार करने, संस्थाएं संगठित करने और शिक्षा देने की स्वतंत्रता रहेगी, बशर्ते उससे सार्वजनिक शांति-व्यवस्था और नैतिक आदर्शों का उल्लंघन न होता हो।
अपने खर्च पर धर्मार्थ संस्थाओं, धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं, स्कूलों और अन्य शैक्षिक संस्थाओं की स्थापना और उनमें अपने-अपने धर्म के पालन करने का अधिकार।
संविधान में अल्पसंख्यक वर्गों के धर्म, संस्कृति और निजी कानून के संरक्षण और उनकी शिक्षा, भाषा, धर्मार्थ संस्थाओं के प्रोत्साहन तथा राज्य और स्वायत्त संस्थाओं द्वारा दिए जाने वाले अनुदान में देय अंश के संरक्षण के लिए पर्याप्त व्यवस्था।
प्रत्येक ऐसे कार्य को कानून के तहत दंडनीय अपराध घोषित करना, जिसके करने या चूक होने से नागरिक अधिकारों का सभी नागरिकों के द्वारा उपयोग करने में बाधा पहुंचती हो और इन अधिकारों का सभी नागरिकों के द्वारा उपयोग सुनिश्चित किया जाना।
केंद्रीय सरकार और प्रांतीय सरकारों के मंत्रिमंडल के गठन में यथासंभव मुस्लिम समुदाय और पर्याप्त जनसंख्या वाले अल्पसंख्यक वर्ग के प्रतिनिधियों को समझौते के द्वारा शामिल किया जाना।
ऽ यह फेडरल स्ट्रक्चर कमेटी एंड माइनॉरिटीज कमेटी के मूल कार्यवृत्त में परिशिष्ट III के रूप में मुद्रित
है, पृ. 1394-99