188 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अल्पसंख्यक वर्गों के संरक्षण और उनके कल्याण के संवर्धन के लिए केंद्रीय और प्रांतीय सरकारों के अधीन सांविधिक विभाग होंगे।
सभी समुदायों को जिन्हें इस समय किसी भी विधान-मंडल में नामजदगी या चुनाव के आधार पर प्रतिनिधित्व प्राप्त है, सभी विधान-मंडलों में पृथक चुनाव के आधार पर प्रतिनिधित्व और अल्पसंख्यक वर्गों के प्रतिनिधित्व का अनुपात संलग्न अनुबंध में निर्दिष्ट अनुपात से कम नहीं होगा और यदि कोई बहुसंख्यक वर्ग का है, तो उसे घटाकर अल्पसंख्यक के समान नहीं माना जाएगा, परंतु दस वर्ष बीतने के बाद पंजाब और बंगाल में मुस्लिमों या किसी भी प्रांत में वहां के किसी भी अल्पसंख्यक वर्ग को संयुक्त निर्वाचन या आरक्षित स्थान सहित संयुक्त निर्वाचन संबंधित समुदाय की सहमति से स्वीकार करने का अधिकार होगा।
प्रत्येक प्रांत में और केंन्द्रीय सरकार के संबंध में लोक सेवा आयोग की स्थापना और जो स्थान गवर्नर जनरल या गवर्नरों की नामजदगी से भरे जाने हैं, उनको छोड़कर लोक-सेवाओं में नियुक्तियां इन आयोगों के द्वारा इस प्रकार की जाएंगी कि कुशलता और आवश्यक योग्यता को ध्यान में रखते हुए विभिन्न समुदायों को निरंतर समुचित प्रतिनिधित्व मिल सके। इस सिद्धांत के कार्यान्वयन के लिए गवर्नर जनरल और गवर्नरों को नियुक्तियों से संबंधित अनुदेश पत्र में और इस प्रयोजन के लिए सेवाओं के गठन की सावधिक समीक्षा करने के लिए अनुदेश दिए जाएंगे।
अगर कोई ऐसा विधेयक पारित किया जाता है, जो किसी विधान-मंडल में समुदाय विशेष का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों में से दो तिहाई सदस्यों के मत में उनके समुदाय के धर्म या धर्म पर आधारित सामाजिक आचार-विचार को प्रभावित करता है या जनता के मूल अधिकारों के मामले में एक-तिहाई सदस्य आपत्ति करते हैं, तब उक्त सदस्य सदन द्वारा विधेयक के पारित किए जाने के बाद एक महीने की अवधि में सदन के अध्यक्ष को अपनी आपत्ति भेज सकेंगे, जो उस आपत्ति को गवर्नर जनरल या गवर्नर के पास, जैसा भी हो अग्रेषित करेगा और गवर्नर जनरल या संबंधित गवर्नर उस विधेयक के कार्यान्वयन को एक वर्ष के लिए स्थगित रखेगा_ इस अवधि के समाप्त होने पर वह इस विधेयक को विधान-मंडल द्वारा पुनः विचार करने के लिए भेज देगा। जब ऐसे विधेयक पर विधान-मंडल द्वारा विचार हो जाए और संबंधित विधान-मंडल उस विधेयक को संशोधित या परिशोधित करना अस्वीकार कर दे, जिससे कि आपत्ति दूर हो सके तब गवर्नर जनरल या गवर्नर जैसा भी हो अपने विवेक के आधार पर उसे स्वीकृत कर सकेगा या स्वीकृति देने से मना कर सकेगा, बशर्ते इस विधेयक को संबंधित समुदाय के दो सदस्यों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में इस आधार पर चुनौती न दे दी जाए कि यह विधेयक उनके मूल अधिकारों में से किसी एक का उल्लंघन करता है।
मुसलमानों की विशेष मांगें
- सीमाओं की सुरक्षा की विशिष्ट आवश्यकताओं को उचित रूप में ध्यान में रखते