अल्पसंख्यक समिति
अम्बेडकर और राव बहादुर आर. श्रीनिवासन का पूरक ज्ञापन
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स्वायत्त शासी भारत के लिए संविधान में दलित वर्गों की सुरक्षा के लिए राजनीतिक उपायों के प्रश्न पर पिछले वर्ष हमने जो ज्ञापन दिया था और जो प्रोसीडिंग्स ऑफ दि माइनॉरिटीज सब-कमेटी के मुद्रित खंड में परिशिष्ट III के रूप में दिया गया है, उसमें हमने यह मांग की थी कि इन उपायों में से एक उपाय दलित वर्गों के लिए विशेष प्रतिनिधित्व होना चाहिए। लेकिन तब हमने विशेष प्रतिनिधित्व के, जिसे हमने उनके लिए आवश्यक समझा था, ब्यौरे नहीं निश्चित किए थे। इसका कारण यह था कि अल्पसंख्यक समिति की बैठकें इस प्रश्न पर पहुंचने के पूर्व ही समाप्त हो गईं। अब हम इस कमी को इस पूरक ज्ञापन के द्वारा पूरा करना चाहते हैं, जिससे उप-समिति के पास, यदि वह इस प्रश्न पर विचार करना चाहती है, ये ब्यौरे उपलब्ध रहें।
I. विशेष प्रतिनिधित्व का विस्तार
(क) प्रांतीय विधान-मंडल में विशेष प्रतिनिधित्व
बंगाल, मध्य प्रांत, असम, बिहार और उड़ीसा, पंजाब और संयुक्त प्रांतों में दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व साइमन कमीशन और इंडियन सेंट्रल कमेटी के द्वारा अनुमानित जनसंख्या के आधार पर उसके अनुपात में होगा।
मद्रास में दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व 22 प्रतिशत होगा।
3. बंबई में-
( I ) यदि सिंध, बंबई प्रेसिडेंसी का भाग बना रहता है, तब दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व
16 प्रतिशत होगा।
( II ) यदि सिंध बंबई प्रेसिडेंसी से अलग कर दिया जाता है, तब दलित वर्गों का
प्रतिनिधित्व वही होगा, जो प्रेसिडेंसी के मुसलमानों का है, क्योंकि दोनों
जनसंख्या की दृष्टि से समान हैं।
(ख) संघीय विधान-मंडल में विशेष प्रतिनिधित्व
संघीय विधान-मंडल के दोनों सदनों में दलित वर्गों को भारत में उनकी जनसंख्या के अनुपात के अनुसार प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा।
आरक्षण
हमने विधान-मंडलों में प्रतिनिधित्व का यह अनुपात निम्नलिखित अनुमानों के आधार पर यह निश्चित किया है-
- हमने यह अनुमान दिया है कि साइमन कमीशन (खंड 1, पृष्ठ 40) और इंडियन सेंट्रल कमेटी (रिपोर्ट, पृष्ठ 44) ने दलित वर्गों की जनसंख्या के जो आंकड़े दिए हैं, वे स्थानों के वितरण के लिए पर्याप्त सही आंकड़ों के रूप में स्वीकार किए जाएंगे।