194 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हमारा अनुमान है कि संघीय विधान-मंडल में सारे भारत की जनता के प्रतिनिधि होंगे और तब गवर्नर के प्रांतों के साथ-साथ भारतीय राज्यों, केंद्र शासित क्षेत्रों और अपवर्जित क्षेत्रों में रहने वाले दलित वर्गों के लोगों की संख्या संघीय विधान में दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व की सीमा निर्धारित करते समय उचित रूप से अतिरिक्त समझी जाएगी।
हमारा अनुमान है कि ब्रिटिश भारत के प्रांतों का जो प्रशासनिक क्षेत्र है वह आगे भी यथावत् रहेगा।
लेकिन जनसंख्या के आंकड़ों के संबंध में अगर इन अनुमानों को चुनौती दी जाती है जैसा कि कुछ निहित स्वार्थ वाले पक्षों ने धमकी दी है और अगर नई जनगणना में, जिस पर दलित वर्गों का कोई नियंत्रण नहीं है और इस आधार पर दलित वर्ग की जनसंख्या का अनुपात कम दिखाया जाता है या अगर प्रांतों के प्रशासनिक क्षेत्रों में परिवर्तन किया जाता है, जिसके कारण जनसंख्या का मौजूदा संतुलन बिगड़ जाता है, तब अपने प्रतिनिधित्व के अनुपात को संशोधित करने और अधिक अनुपात की मांग करने के लिए दलित वर्गों का अधिकार सुरक्षित रहेगा। इसी प्रकार अगर ऑल इंडिया फेडरेशन स्थापित नहीं होता है, तब वह संघीय विधान-मंडल में अपने प्रतिनिधित्व के अनुपात में पुनः समायोजन करने के बारे में सहमत होंगे।
II. प्रतिनिधित्व की प्रक्रिया
दलित वर्गों को प्रांतीय और केंन्द्रीय विधान-मंडलों के लिए अपने प्रतिनिधि अपने वोटरों के पृथक निर्वाचन-क्षेत्रों के द्वारा चुनने का अधिकार होगा। संघीय या केंन्द्रीय विधान-मंडल के उच्च सदन में उनके प्रतिनिधित्व के बारे में, यदि यह निर्णय होता है कि इसके लिए प्रांतीय विधान-मंडलों से अप्रत्यक्ष चुनाव हो, तब दलित वर्ग, जहां तक उच्च सदन में उनके प्रतिनिधित्व का प्रश्न है, पृथक निर्वाचन-क्षेत्र के अपने अधिकार को छोड़ने पर सहमत होगा बशर्ते किसी भी आनुपातिक प्रतिनिधि प्रणाली में उनकी सीटों के कोटे को सुरक्षित रखने के प्रबंध किए जाएं।
दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन-क्षेत्र के स्थान पर संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र और आरक्षित स्थान की प्रणाली शुरू नहीं की जा सकेगी, सिवाए इसके निम्नलिखित शर्तें पूरी कर दी गई हों-
(क) संबंधित विधान-मंडल में दलित वर्गों के बहुसंख्यक प्रतिनिधियों की मांग
पर जनमत संग्रह हो और जिसके परिणामस्वरूप मतदान करने के योग्य दलित
वर्ग के सदस्यों का पूर्ण बहुमत हो जाए।
(ख) बीस वर्ष तक और जब तक संपूर्ण वयस्क मताधिकार न प्राप्त हो जाए
तब तक ऐसे किसी जनमत संग्रह की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी।