10. अल्पसंख्यक समिति - Page 212

अल्पसंख्यक समिति

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III. दलित वर्ग को परिभाषित करने की आवश्यकता

चूंकि प्रांतीय विधान-मंडलों में ऐसे लोग दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामजद किए गए, जो दलित वर्गों के नहीं थे और ऐसे दृष्टांतों की कमी नहीं है, जिन्होंने अपने को दलित वर्गों के प्रतिनिधि के रूप में नामजद करा लिया है। अतः दलित वर्गों के प्रतिनिधितव का अंधाधुंध दुरुपयोग हुआ है। यह दुरुपयोग इस कारण हुआ कि हालांकि गवर्नर को दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व करने के लिए व्यक्तियों को नामजद करने का अधिकार दिया गया, उनसे यह अपेक्षा नहीं की गई थी कि वह उन्हीं व्यक्तियों को नामजद करें, जो दलित वर्गों के हों। चूंकि नए संविधान के अधीन नामजदगी के स्थान पर चुनाव हुआ करेगा, अतः इस प्रकार के दुरुपयोग की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती है। लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए कि विशेष प्रतिनिधित्व के प्रयोजन को विफल करने की कोई गुंजाइश न रहे, हम यह चाहते हैं कि-

(1) दलित वर्गों का अधिकार सिर्फ अपने लिए पृथक निर्वाचन का ही न रहे, बल्कि उनका अधिकार अपने लोगों के द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाना भी रहे।

(2) प्रत्येक प्रांत में दलित वर्ग का आशय ऐसे व्यक्ति से रहे, जो ऐसे समुदाय का है, जो अस्पृश्यता जैसी प्रथा से ग्रस्त है और जिसका नाम चुनाव के प्रयोजन के लिए बनाई गई अनुसूची में उल्लिखित है।

IV. संज्ञा

इस प्रश्न के इस भाग पर विचार करते समय हम यह उल्लेख करना चाहते हैं कि दलित वर्ग की मौजूदा संज्ञा के बारे में दलित वर्ग के सदस्यों द्वारा आपत्ति की गई है और उन्होंने तथा इस वर्ग से बाहर के व्यक्तियों ने जिन्हें दलित वर्गों में रुचि रही है, इस बारे में विचार किया है। यह संज्ञा अप्रतिष्ठाकारी और तिरस्कारपूर्ण है। नए संविधान को तैयार करते समय इस अवसर का लाभ मौजूदा संज्ञा को बदलने के लिए किया जाए। हमारा विचार है कि इनको ‘दलित वर्ग’ के बजाए ‘अवर्ण हिन्दू’, ‘सुधारवादी हिन्दू’ या ‘अनुदार हिन्दू’ के नाम से पुकारा जाना चाहिए। किसी विशेष संज्ञा के बारे में जोर देने के लिए हमारे पास कोई अधिकार नहीं है। हम उनको सिर्फ सुझाव दे सकते हैं और हमारा विश्वास है कि यदि दलित वर्गों को इस बारे में ठीक ढंग से समझा दिया जाए, तब वे ऐसी संज्ञा को स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं करेंगे, जो उनके लिए सबसे अधिक उचित होगी।

इस ज्ञापन में उल्लिखित मांगों का समर्थन करते हुए हमें सारे भारत के दलित वर्गों से बड़ी संख्या में तार प्राप्त हुए हैं।