198 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बहुत अधिक विरोध हो रहा है। क्या यह सही नहीं है कि आप ऐसे रक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं, जिनका परिणाम यह होगा कि आप पे्रस एवं विधान-मंडल में व्यक्त विधिसम्मत जनमत के क्षेत्राधिकार से पूरी तरह बाहर हो जाएंगे?
माननीय पी.जे. फगनः नहीं, मैं नहीं समझता कि इससे हम क्षेत्राधिकार से बाहर हो जाएंगे। मैं कहूंगा, निश्चित रूप से नहीं। निश्चय ही, मैं नहीं समझता कि इससे वे स्वस्थ जनमत के क्षेत्राधिकार से बाहर हो जाएंगे।
390. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं पुनः आपसे पूछना चाहता हूं, क्या आप यह नहीं सोचते कि यदि आप भारतीय मंत्रियों की सम्मति से भारतीय विधान-मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों के नियंत्रणाधीन होंगे, तो आपको स्वयं भारतीय मंत्रियों से उस समय बेहतर संरक्षण मिलेगा, जब पे्रस में या जनता द्वारा आपकी आलोचना की जाए, जो क्षेत्राधिकार से बाहर रहकर नहीं मिल पाएगा?
माननीय पी.जे. फगनः नहीं, मेरे विचार में संघों का यह मत नहीं होगा।
391. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आपने अभी अपने इस कथन के समर्थन में साइमन कमीशन की रिपोर्ट में से कुछ उद्धरण पढ़े हैं। क्या यह सच नहीं है कि सर जान साइमन को विधि और व्यवस्था को हस्तांतरण करने की सिफारिश अपनी इच्छा के विपरीत करनी पड़ी, क्योंकि वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि इसे आरक्षित विषय रखने से उस विभाग में कार्यरत सेवाओं को अत्यधिक आलोचना का शिकार होना पड़ेगा?
माननीय पी.जे. फगनः मेरे विचार में यह भी एक ऐसा विषय है, जिस पर बेहतर होगा कि हम बात न करें। यह बहुत अधिक विवादास्पद विषय है, इस पर अलग-अलग मत हैं। इस विषय पर सर जान साइमन और, मैं उसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या आप इससे सहमत हैं कि इसी कारण इसे साइमन कमीशन की रिपोर्ट में स्थान मिला है?
माननीय आस्टिन चेम्बरलेनः साक्षी पहले ही कह चुका है कि उसे इस प्रश्न का उत्तर देने से माफ किया जाए।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यदि वह इसका उत्तर देना नहीं चाहते, तो मैं इस पर जोर देना नहीं चाहता।
माननीय आस्टिन चेम्बरलेनः निश्चय ही, यह सिविल सेवा के प्रतिनिधियों पर दबाव डालने के लिए उचित प्रश्न नहीं है, जो अपनी विशेष स्थिति और दावों को व्यक्त करने के लिए आए हैं, न कि भारत में सामान्य सुधार संबंधी चर्चा में भाग लेने के लिए।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः सर जान साइमन ने विधि और व्यवस्था के हस्तांतरण के लिए जो कारण बताया है, वह यह है कि इस विभाग को विधान-मंडल और मंत्री के नियंत्रण से बाहर आरक्षित रखने से पे्रस और जनता उसकी आलोचना करेंगे।