11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 216

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

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वाइकाउंट बर्नमः स्टेट्यूटरी कमीशन के सदस्य के नाते डॉ. अम्बेडकर ने जो कुछ कहा है वह अत्यंत भ्रामक वृतांत है।

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः संभव है, मैंने उसे गलत पढ़ा हो।

(2)

श्री सच्चिदानंद सिन्हा, बेरिस्टर एट लॉ, एम.आई.सी.

1985. डा. भीमराव अम्बेडकरः सबसे पहले मैं आपसे गवर्नर के विशेष अधिकारों के बारे में, विशेषकर शांति और व्यवस्था भंग होने की रोकथाम करने संबंधी कार्रवाई और उसके अधिकार के बारे में एक प्रश्न पूछना चाहता हूं। यदि अनुमति हो तो मैं आपका ध्यान हस्तांतरित विषयों के प्रशासन के बारे में विद्यमान स्थिति की ओर आकर्षित करना चाहूंगा। क्या भारत सरकार अधिनियम आपको मिल गया है?

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः हां।

1986. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या आप भारत सरकार अधिनियम की धारा 52 को देखेंगे?

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः हां।

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं आपके सामने भारत सरकार अधिनियम की धारा 45 का हवाला देना नहीं चाहता-इसमें हस्तातंरित और आरक्षित विषयों के वर्गीकरण का उपबंध किया गया है, यह हम जानते हैं। मैं केवल नियंत्रण के प्रश्न पर बात कर रहा हूं। यदि आप धारा 52 को देखें जो उपधारा (1) के अनुसारः फ्प्रांत का गवर्नर अधिसूचना द्वारा, उन लोगों को मंत्री नियुक्त कर सकता है, जो उसकी कार्य-परिषद के सदस्य नहीं हैंय् आदि, आदि।

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः जी हां।

1988. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इसके बाद हम उपधारा (3) पर आते हैं, इसमें लिखा है-फ्हस्तांतरित विषयों के बारे में गवर्नर अपने मंत्रियों की सलाह से काम करेगा, जब तक कि उसे उनकी राय से भिन्न राय रखने का कोई पर्याप्त कारण दिखाई न दे। उस स्थिति में वह उस सलाह से अलग कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा कर सकता है।य्

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः जी हां।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं आपका ध्यान जिस बात की ओर आकृष्ट करना चाहता हूं, वह यह है कि इस धारा का यह आशय नहीं है कि जहां कहीं गवर्नर समझे कि शांति और व्यवस्था संकट में है, वहां यह अपने मंत्रियों की राय को अस्वीकार करेगा।

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः जी नहीं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इस धारा में विशिष्ट उपबंध नहीं किया गया है,

ऽमिनट्स आफ एविडेन्स, खंड 21-क, 22 जून 1933, पृ. 256-58