11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 217

200 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जैसा कि अब श्वेत पत्र में किया गया है?

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः नहीं, ऐसा ही है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आप इंस्ट्रूमेंट आफ इंस्ट्रक्शंस देखें, जो गवर्नर को जारी किया गया है, जिसमें बताया गया है कि किन-किन स्थितियों में उसे मंत्रियों की सलाह के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः मेरे पास यहां पर उसकी प्रति नहीं है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आप उस पुस्तक के पृष्ठ 269 पर देख सकते हैं।

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः हां, यह मेरे पास है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इंस्ट्रूमेंट आफ इंस्ट्रक्शंस के पृष्ठ 270 पर खंड vi में कहा गया है-फ्किसी मंत्री की सलाह पर विचार करते समय और यह फैसला करते समय कि किसी मामले में उसकी राय से मतभेद रखने के लिए पर्याप्त कारण है या नहीं_ आपको विधान परिषद से उसके संबंध एवं पे्रसिडेन्सी के जन-प्रतिनिधियों द्वारा व्यक्त की गई वहां की जनता की इच्छा को भी ध्यान में रखना होगा।य् दूसरे शब्दों में, गवर्नर वर्तमान परिस्थितियों के अंतर्गत मंत्री को हस्तांतरित विभागों के विषय में उसकी सलाह को तभी अस्वीकार कर सकता है, जब उसका निष्कर्ष यह हो कि मंत्री को विधान-मंडल का अथवा निर्वाचन-क्षेत्र का समर्थन प्राप्त नहीं है।

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः मैं मानता हूं, ऐसा है।

  1. डा. भीमराव अम्बेडकरः स्पष्टता की दृष्टि से, यदि अनुमति हो तो, मैं यह कहना चाहूंगाः हस्तांतरित विभागों का प्रशासन करने की वर्तमान प्रणाली के अंतर्गत गवर्नर को शांति और सौहार्द कायम रखने के लिए, विशेष निषेधाधिकार (नीटो) प्राप्त नहीं है, जो अधिकार गवर्नर को खंड (क) के अधीन दिया गया है।

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः ऐसा ही है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि आज विधि और व्यवस्था विभाग एक आरक्षित विषय हैं, वह निस्संदेह, इस विभाग के क्षेत्र के अंतर्गत अपनी इच्छानुसार कोई भी कार्रवाई कर सकता है?

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः हां।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः किन्तु वह मंत्री के पास जाकर यह नहीं कह सकता, हालांकि आप हस्तांतरित विभाग से संबद्ध हैं, मैं आपकी सलाह स्वीकार नहीं करूंगा, क्योंकि जो कार्रवाई आप करना चाहते हैं, वह शांति और व्यवस्था के लिए घातक होगी?

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः जी नहीं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इस प्रकार, अंततोगत्वा, यह एक प्रतिगामी उपबंध है?

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः बेशक।