11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 218

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

201

  1. डा. भीमराव अम्बेडकरः आज मंत्री अपने विभाग में जो चाहे कार्रवाई कर सकता है। श्वेत पत्र (मान लें कि श्वेत पत्र पारित हो जाता है) की नई योजना के तहत प्रत्येक विभाग एक हस्तांतरित विभाग होगा। शांति और व्यवस्था कायम रखने के अपने विशेष अधिकार से उत्पन्न गवर्नर का निषेधाधिकार एक विशेष विधि और व्यवस्था विभाग तक सीमित रहने के बजाए, हर विभाग तक विस्तारित हो जाएगा।

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः हां।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः उस सीमा तक हर विभाग में उत्तरदायित्व का ह्रास हो जाएगा, हालांकि प्रत्येक विभाग एक हस्तांतरित विभाग होगा?

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः ऐसा ही है।

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अब मैं सेवाओं के प्रश्न पर आना चाहूंगा। आप परिशिष्ट 7 देखें, जिसमें उनका उल्लेख किया गया है...।

वाईकाउंट बर्नमः अध्यक्ष महोदय! व्यवस्था के मुद्दे पर, इस बारे में हमें यही स्पष्टीकरण दिया गया था कि प्रांतों के गवर्नरों के वर्तमान अधिकार क्या हैं, किन्तु हमें यह नहीं बताया गया कि उनका उल्लेख कहां पर किया गया है।

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैंने भारत सरकार अधिनियम की धारा 52 (1) की ओर ध्यान आकृष्ट किया था।

वाईकाउंट बर्नमः किसके प्राधिकार पर यह स्पष्टीकरण दिया गया है?

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुझे नहीं मालूम।

वाईकाउट बर्नमः यह स्पष्टीकरण देने के लिए आपको किसने प्राधिकृत किया है?

  1. डा. भीमराव अम्बेडकरः अधिनियम के बारे में मेरा यह अपना निर्वचन है और साक्षी इससे सहमत हैं। मैं धारा 52 और इंस्ट्रूमेंट आफ इंस्ट्रक्शंस का हवाला देता हूं जो अधिनियम का अंग है। अब सेवाओं के प्रश्न के बारे में, परिशिष्ट 7 में, आप देखेंगे-मैं हर मुद्दे का विनिर्दिष्ट तौर पर हवाला देना नहीं चाहता कि उसमें यह उपबंध किया गया है कि स्टेट इन कौंसिल सेवा शर्तों के वर्गीकरण और विनियमन संबंधी समस्त शक्तियां अपने पास रखेगा।

श्री सच्चिदानंद सिन्हाः हां।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं अब धारा 96 ख, उप-धारा (2) का उल्लेख करना चाहूंगा। वह इस प्रकार है- फ्सेक्रेटरी ऑफ स्टेट इन कौंसिल भारत में सिविल सेवाओं का वर्गीकरण, उनकी भर्ती की पद्धतियां, उनकी सेवा शर्तों, वेतन और भत्ते और अनुशासन तथा आचरण को विनियमित करने वाले नियम बना सकेगाय् तथा आगे फ्ऐसे नियम, उस सीमा तक और उन विषयों के बारे में, जो विहित किए जाएं, नियम बनाने के अधिकार गवर्नर जनरल इन कौंसिल या स्थानीय सरकारों को प्रत्यायोजित कर