202 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सकेंगे, अथवा लोक सेवाओं को विनियिमित करने वाली विधियाँ बनाने के लिए भारतीय विधान-मंडल को अथवा स्थानीय विधान-मंडलों को प्राधिकृत कर सकेंगे।य्
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः जी हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इस प्रकार भारत सरकार अधिनियम के अधीन आशय यह था कि परिलब्धियों तथा सेवा शर्तों के बारे में नियम बनाने के इस अधिकार को गवर्नर जनरल अथवा भारतीय विधान-मंडलों को हस्तांतरित किया जाए?
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः अथवा स्थानीय सरकारों को।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः और आशय यह था कि सेवा-शर्तें ऐसी हों कि भारत में आरंभ की जाने वाली नई शासन-प्रणाली उन्हें आत्मसात कर सकें?
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः यही आशय प्रतीत होता है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः उदाहरण के लिए, यदि परिशिष्ट 7 में जो उपबंध दिए गये हैं वे अधिनियमित कर दिए जाएं, तो भारत सरकार अधिनियम के अंतर्गत भारतीय प्राधिकारियों पर नियंत्रण बढ़ाने की प्रगति रुक जाएगी?
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः इसीलिए मैंने अपने ज्ञापन में कहा है कि लोक सेवाओं से संबंधित प्रस्ताव भारत के लिए संतोषजनक नहीं है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यह बहुत जरूरी है और इसका उपबंध वस्तुतः भारत सरकार अधिनियम में ही कर दिया गया है, कि इन अधिकारों का प्रयोग सेक्रेटरी ऑफ स्टेट इन कौंसिल द्वारा किया जा रहा है और वे उचित शर्तों के अधीन भारतीय विधान-मंडल को प्रत्यायोजित की जा सकती हैं।
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यदि श्वेत पत्र के प्रस्ताव अधिनियमित कर दिए जाएं, तो हस्तांतरण की यह प्रक्रिया रुक जाएगी?
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः स्पष्ट रूप से।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः साथ ही, सेवाओं के अधिकारों की कुछ विनिर्दिष्ट मदों को लीजिए। उदाहरण के लिए, पृष्ठ 121 पर 14 को लीजिए-फ्गवर्नर की वैयक्तिक सहमति, औपचारिक निन्दाय्, आदि-आदि_ 15ः नियुक्ति के बारे में गवर्नर की वैयक्तिक सहमति_ 16ः किसी वरिष्ठ अधिकारी के किसी आदेश के विरुद्ध गवर्नर से शिकायत करने का अधिकारय्, आदि-आदि। अब, सेवा शर्तों के रूप में वे अधिकार वास्तव में अंतिम नहीं हैं_ वे विकासशील चरण पर हैं। ये इसलिए अधिनियमित की गई थी, क्योंकि किसी को भी निश्चित रूप से पता नहीं था कि मंत्री की प्रतिक्रिया क्या होगी?
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः डॉ. अम्बेडकर आपका प्रश्न क्या है?
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मेरा प्रश्न है-जो सेवा शर्तें अधिकथित की गई हैं