भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
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और जिनकी ओर मैंने अपना ध्यान आकृष्ट किया है उनमें से कुछ प्रयोग के तौर पर अधिनियमित की गई थीं, ताकि यह पता चल सके कि जनता का चुना हुआ मंत्री और सिविल सेवा के बीच किए गए इस प्रयोग का अंततः क्या परिणाम होगा?
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः जी हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यह आशय नहीं था कि उनको अंतिम माना जाए।
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः नहीं, मैं मानता हूं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः और यदि वे वर्तमान रूप में अधिनियमित कर दिए जाएं, तो मैं पुनः कहूंगा कि उत्तरदायी शासन प्रणाली में सिविल सेवा की शर्तों को आत्मसात करने की प्रक्रिया रुक जाएगी।
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः जी हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इस केंद्रीय उत्तरदायित्व के बारे में मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहूंगा। सर हेनरी गिडने के एक प्रश्न के उत्तर में आपने कहा था कि फेडरेशन के उद्घाटन के लिए तारीख नियत किए जाने के लिए आप बहुत उत्सुक हैं?
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इसके विपरीत, जैसा कि आपको विदित है, इस बात पर जोर दिया जाता है कि कोई खास तारीख नियत करना असंभव है, क्योंकि अनिश्चितता के अनेक तत्त्व विद्यमान हैं, जैसे हो सकता है देशी राज्य के शासक विहित समय पर अपनी स्वीकृति न दें और आप यह भी जानते हैं कि इससे बचने के लिए श्वेतपत्र में कुछ अस्थायी उपबंध अधिनियमित किए गए हैं। क्योंकि इस मुद्दे पर मैं आपकी राय लेने के लिए उत्सुक हूं, मैं यह सुझाव दे रहा हूं_ मान लीजिए, अपेक्षित संख्या में देशी राज्यों के प्रवेश के लंबित रहते हुए केन्द्रीय विधान-मंडल में अंशतः पदाधिकारियों और अंशतः गैर शासकीय लोगों के एक नामजद दल के साथ तुरंत आरंभ कर दिया जाए, ताकि संघ तब तक अधर में न लटका रहे, जब तक उसमें अपेक्षित संख्या में देशी राज्य शामिल न हो जाएं, क्या आपको इस प्रकार की पद्धति पर कोई आपत्ति होगी?
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः मैं इस बारे में बिना सोचे समझे अपनी कोई राय नहीं दे सकता, किन्तु इस विषय पर विचार-विमर्श किया जा सकता है। यह मुद्दा विचारणीय है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं उस मुद्दे को स्पष्ट करवाना चाहता हूं। मैं यह मान लेता हूं कि आप इस स्थिति से सहमत नहीं हैं कि केन्द्र में उत्तरदायित्व की पूर्व शर्त यह हो कि देशी रियासतों के राजाओं के साथ ब्रिटिश भारत का एक संघ हो?
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः मैं कोई राय व्यक्त करना नहीं चाहता, क्योंकि मेरा मानना है कि श्वेत पत्र में उल्लिखित प्रस्ताव गोलमेज सम्मेलन में तय किए गए थे।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं जो कहना चाहता हूं वह यह हैः श्वेत पत्र को