204 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
छोड़ दें। आप यह नहीं कहते अथवा आप इस बात के लिए राजी नहीं हैं कि संघ बनने पर ही ब्रिटिश भारत में केन्द्रीय सरकार को उत्तरदायी सरकार बना सकते हैं?
श्री सच्चिदानंद सिन्हाः नहीं, श्वेत पत्र से अलग हट कर नहीं।
श्री बटलरः आगे बढ़ने से पहले, अध्यक्ष महोदय! मैं यह कहना चाहूंगा कि हम वर्तमान भारत सरकार अधिनियम के इन प्रश्नोत्तरों में दिए गए निर्वचनों, विशेषकर उन परिसीमाओं को स्वीकार नहीं कर सकते, जो वर्तमान सरकार के अनुदेशों के खंड VI और वर्तमान भारत शासन अधिनियम की धारा 52 के अधीन धारित की गई है।
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नरेन्द्र मंडल की ओर से मीर मकबूल महमूद,
डॉ. पी.के. सेन, श्री के.एम. पणिक्कर और श्री बी. काक
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः इन प्रश्नों से जो कुछ सामने आया है, उसे मैं अपनी दृष्टि से पेश करना चाहता हूं। आपको विदित है कि श्वेत पत्र में संघ के उद्घाटन के लिए एक शर्त निर्धारित की गई है, वह है देशी राज्यों की एक निश्चित संख्या इसमें शामिल हो। इसके बाद वित्त के हस्तांतरण के लिए एक महत्त्वपूर्ण शर्त निर्धारित की गई है, वह है बैंक की स्थापना। मैं आपसे यह पूछना चाहता हूं कि, यदि वित्त एक हस्तांतरित विषय न हो, तो क्या देशी राज्य राजाओं के संघ में शामिल होने के लिए तैयार होंगे?
मीर मकबूल महमूदः इस प्रश्न के बारे में मुझे कोई निश्चित निर्देश नहीं दिए गए हैं, लेकिन उनकी बातचीत के रवैये से मैं नहीं समझता कि वे इसके लिए तैयार होंगे।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यदि वित्त हस्तांतरित विषय नहीं होगा, तो वे संघ में शामिल होने के लिए तैयार नहीं होंगे?
मीर मकबूल महमूदः मैं ऐसा नहीं मानता।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अब अन्य विषयों को लें, आपने पिछली बार जो साक्ष्य दिया था, उसके दौरान, मीर मकबूल! आपने कहा था कि यदि समस्त राजा-महाराजा संघ में तुरंत शामिल न हों, तो आप एक ऐसी व्यवस्था शुरू करना चाहेंगे, जिससे जो राजा-महाराजा संघ में शामिल होते हैं उन्हें संघ में शामिल न होने वालों की तुलना में विशेष रूप से मतों का लाभ उठाने का अवसर दिया जाएगा। मैंने ठीक पूछा है न?
मीर मकबूल महमूदः इससे स्थिति का केवल एक पहलू प्रकट होता है।
- डा. भीमराव अम्बेडकरः यह वही स्थिति है, जिसे आप मानते हैं?
मीर मकबूल महमूदः यह अर्ध सत्य है, पूर्ण नहीं। हम स्थिति के दो पहलू मानते हैं।
- डा. भीमराव अम्बेडकरः आपके महासंघ को मैं जानता हूं?
मीर मकबूल महमूदः नहीं, एक पहलू यह है, कि जो राज्य शामिल हो रहे हैं, वे
ऽमिनिट्स आफ ऐविडेन्स, खंड 11-क, 27 जून 1933, पृ. 372-76