206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अब मैं राष्ट्रीयता के बारे में कुछ प्रश्न पूछना चाहता हूं। मुझे नहीं मालूम आपमें से कौन सज्जन इस विषय पर अपना पक्ष पेश करेंगे। मेरे विचार में यह तो सभी का कहना है कि कानूनी दृष्टि से ब्रिटिश भारत के लिए देशी राज्य के लोग परदेशी हैं।
श्री के.एम. पणिक्करः वे ब्रिटिश संरक्षित लोग हैं, किन्तु कानून की दृष्टि में, वे परदेशी हैं।
- माननीय हरि सिंह गौड़ः क्या वे ब्रिटिश प्रजा नहीं हैं?
मीर मकबूल महमूदः नहीं, वे ब्रिटिश प्रजा नहीं हैं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः वे ब्रिटिश भारत में जिसे विदेशियों विषयक अधिनियम कहते हैं, उसके अंतर्गत आते हैं।
मीर मकबूल महमूदः मैं ऐसा नहीं समझता।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आप मेरा कहना मानें कि वे परदेशी हैं। खैर, यह सब मानते हैं कि वे ब्रिटिश प्रजा नहीं हैं, और मेरा अनुमान है, आप इस स्थिति को नियमित करना नहीं चाहते, जो अखिल भारतीय संघ के अनुरूप और अनुकूल होगी कि एक सामान्य भारतीय राष्ट्रीयता हो?
मीर मकबूल महमूदः ऐसा इरादा नहीं था।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इसलिए मैं यह मान लूं कि इसका परिणाम यह होगा कि अब जो स्थिति है, यदि वही चलती रहे तो परदेशी लोग (मेरा मतलब है देशी राज्यों की जनता) मताधिकार के हकदार होंगे, संघ और प्रांतों के विधान-मंडलों के सदस्यों के रूप में खड़े होने के हकदार होंगे और सम्राट की प्रजा न होते हुए भी, सम्राट के अधीन विश्वास का पद ग्रहण करने के अधिकारी होंगे?
मीर मकबूल महमूदः यह अब भी संभव है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं जानता हूं, संभव है।
मीर मकबूल महमूदः यह अब भी हुआ है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः लेकिन मैं जो कहना चाहता हूं वह है कि क्या आप इसे एक विसंगति नहीं मानते?
मीर मकबूल महमूदः हम ऐसा नहीं समझते।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या आप ऐसा कोई संविधान बता सकते हैं, जिसके अधीन किसी परदेशी को मताधिकार प्राप्त हो, वह विधान-मंडल के सदस्य के रूप में खड़े होने का अधिकारी हो और कोई विश्वास का पद धारण करने के लिए भी हकदार हो?
मीर मकबूल महमूदः हमारे प्रतिष्ठित प्रतिनिधि सर पी. पट्टणी एक्जीक्यूटिव कौंसिल (कार्यकारी परिषद) के सदस्य थे।