208 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कठिन है। दुनिया के दूसरे भागों में क्या स्थिति विद्यमान है अथवा नहीं इससे हमें बहुत मदद नहीं मिलेगी, क्योंकि ब्रिटिश सम्राट के बारे में देशी राज्य की स्थिति बहुत अद्वि तीय है और इसलिए हमारे यहां यह व्यवस्था है (भले ही वह विसंगतिपूर्ण हो) जबकि देशी राज्य की प्रजा अपने शासक के प्रति निष्ठावान होती है, वह सम्राट के प्रति भी निष्ठावान है और कानूनी स्थिति तथा उससे उत्पन्न होने वाली विवक्षाओं को समायोजित करने की दृष्टि से इस मामले पर सभी पहलुओं से विचार करना होगा। साक्ष्य के दौरान ऐसा उत्तर देना संभव नहीं है कि ऐसी स्थिति के कानूनी भावार्थ क्या होने चाहिएं।
- श्री जयकरः अतः क्या मैं यह मान सकता हूं कि देशी राज्य इस मुद्दे पर किसी अंतिम और अकाट्य निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं?
मीर मकबूल महमूदः जी नहीं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं संतुष्ट हूं कि आप स्थिति को विसंगति के रूप में और विचार-योग्य मानते हैं?
मीर मकबूल महमूदः निःसंदेह यह विचार-योग्य है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अब मैं आपसे इस संघीय न्यायालय के बारे में प्रश्न पूछना चाहता हूं। आप श्वेत-पत्र के पैरा 155 पर दृष्टिपात करें। आप देखेंगे कि ऐसे संघीय न्यायालय के लिए कोई उपबंध नहीं है, जिसे एक देशी शब्द के नागरिक और ब्रिटिश भारतीय प्रांत के बीच अथवा ब्रिटिश भारतीय प्रांत के किसी नागरिक और एक देशी राज्य के बीच उत्पन्न होने वाले विवाद में भी वह प्राधिकृत हो। क्या आप इससे सहमत नहीं हैं कि एक ऐसे मंच की व्यवस्था करना आवश्यक है, जिसके द्वारा किसी देशी राज्य के विरुद्ध परिसंघीय विधि से उत्पन्न वाद हेतुक रखने वाले ब्रिटिश भारतीय व्यक्ति को एक न्याय मंच मिले जहां वह अपने अधिकारों की मांग कर सके?
मीर मकबूल महमूदः जैसा मैंने श्वेत-पत्र को समझा है उसमें यह परिकल्पित है कि धारा 155 केवल कुछ विशेष मामलों को ही लागू नहीं होगी जहां पक्षकार देशी राज्य हैं, अथवा राज्य और प्रांत हैं, अथवा देशी राज्य और फेडरेशन हैं, अथवा प्रांत और फेडरेशन हैं। जहां तक व्यक्ति विशेष का संबंध है जिसे ब्रिटिश भारतीय प्रांत या किसी देशी राज्य के खिलाफ वाद हेतुक प्राप्त है वास्तव में ऐसा व्यापक उपबंध नहीं है कि संघीय न्यायालय को इस बारे में कोई अधिकार प्राप्त होगा। स्पष्ट है कि इसका तात्पर्य है कि वाद हेतुक या प्रतिवादी का निवास स्थान उस मंच को तय करेगा जहां मुकदमा किया जाएगा जैसा कि सिविल प्रक्रिया संहिता के अनुसार साधारणतया किया जाता है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः प्रश्न यह नहीं है। प्रश्न है कि संघीय न्यायालय को अधिकार प्राप्त होगा या नहीं?
मीर मकबूल महमूदः नहीं, यह परिकल्पित नहीं है कि संघीय न्यायालय को अधिकार