11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 230

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

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हमें उस अंतराल के बारे में बताएंगे, जिसे आप विधि और व्यवस्था को हस्तांतरित करने से पहले रखना चाहेंगे।

माननीय माइकल ओ डायरः मैं फिलहाल इसे छोड़ दूंगा। अभी सांप्रदायिक उग्रवाद को शांत होने दें। जब मंत्रीगण जिन्हें काफी अधिकार दिए गए हैं, भूराजस्व, सिंचाई और अन्य विभागों में उन शक्तियों का प्रयोग कर लें और यह दिखा दें कि वे और अधिक अधिकार सौंपे जाने के योग्य हैं, और जो ब्रिटिश विरोधी आंदोलन चल रहे हैं और जो आतंकवादी गिरोह हैं, कुछ प्रांतों में फैल रहे हैं, दबा दिए जाएं और जब स्थिति अपेक्षाकृत अनुकूल हो जाए, तो मैं विधि और व्यवस्था का विषय हस्तांतरित करने के पक्ष में होऊंगा।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आप से पूछा गया था कि क्या भारतीय जनता का कोई ऐसा वर्ग है, जो आपके द्वारा प्रस्तावित योजना को पसंद करेगा। आपने कहा था कि हां, भारत में कुछ ऐसे वर्ग होंगे जो उसे स्वीकार करेंगे।

माननीय माइकल ओ डायरः ठीक है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं आपसे ये पूछना चाहता हूं कि आप दूसरी बात पर विचार करें, जो आपके सामने रखी जा रही है कि भारत में ऐसा कोई वर्ग नहीं है, जो उसे स्वीकार करेगा। मैं आपसे ऐसा विचार करने के लिए कहता हूं।

माननीय माइकल ओ डायरः ठीक है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः तब हमें बताएं कि आपका अगला कदम क्या होगा? मान लीजिए कि आपने यह देखा कि भारत में ऐसा कोई वर्ग नहीं है, जो आपके प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार हो, तो उस स्थिति में आप संसद को क्या सलाह देंगे?

माननीय माइकल ओ डायरः मैं उस दशा में वही काम करूंगा, जो कि भारतीय लोगों के लाभ के लिए सर्वाधिक उपयुक्त समझूंगा।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आपकी स्थिति ऐसी है कि जो आप ठीक समझें करें और भारतीयों को स्वीकार करने या स्वीकार न करने के लिए छोड़ दें?

माननीय माइकल ओ डायरः हां, समय पर विश्वास करते हुए कि वे देखेंगे कि लागू किए गए प्रतिबंध....।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः बहस की खातिर आप यह मान लें कि यदि अंततोगत्वा लंबी प्रतीक्षा के बाद आपने यह देखा कि कोई भी भारतीय वर्ग आपकी योजना को मानने के लिए तैयार नहीं है, तो आप संसद को क्या सलाह देंगे?

माननीय माइकल ओ डायरः मैं संसद को सलाह दूंगा कि वह योजना जिसे आप व्यवहार्य और व्यावहारिक समझें, इस आशा में जारी रखें कि कालांतर में लोग यह समझ जाएंगे कि आपकी स्थिति एक नैसर्गिक स्थिति है और वे एक युक्ति-युक्त मत स्वीकार करने की स्थिति में आने लगेंगे।