11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 231

214 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुझे अफसोस है कि आप मेरा प्रश्न नहीं समझ रहे हैं। मेरा प्रश्न पूरी तरह से विशेष प्रश्न है।

माननीय माइकल ओ डायरः मैं उसे संक्षेप में इस तरह कह सकता हूं कि, मैं नहीं समझता कि लोग अनिश्चित काल तक अयुक्तिसंगत दृष्टिकोण पर डटे रहेंगे।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मान लीजिए कि यह सोचते हैं कि श्वेत-पत्र योजना या आपकी योजना इतनी बुरी है कि वे इसे हाथ भी नहीं लगाएंगे?

माननीय माइकल ओ डायरः सम्राट का शासन सर्वोत्तम ढंग से चलना चाहिए। जिस तरह से भी आप ऐसा कर सकें।

* * * *

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः अध्यक्ष महोदय! इससे पहले कि माननीय माइकल ओ डायर यहां से प्रस्थान करें, मैं एक तथ्य का उल्लेख करना चाहूंगा। माननीय माइकल ओ डायर ने श्री बटलर के एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि साइमन कमीशन ने विधि और व्यवस्था के अंतरण के बारे में सिफारिश की थी। यह साइमन कमीशन की रिपोर्ट

खंड 5, पैरा 369 है। यही वह पैरा है, जो आपकी सोच में था, क्या ऐसा नहीं था, ‘इस रिपोर्ट को लिखने में हमने भारत में पिछले कुछ महीनों की घटनाओं के संबंध में कोई संकेत नहीं किया है’?

माननीय माइकल ओ डायर ः हां, यह ठीक है।

  1. (क) माननीय डॉ. भीमराव अम्बेडकरः लेकिन मुझे आपको यह बता देना चाहिए कि हममें से अधिकांश ने यहां की घटनाओं से, गांधी जी के असहयोग आंदोलन की घटनाओं से समझा था, न कि निश्चित रूप से उन सांप्रदायिक दंगों से जो भारत में हुए हैं, जैसे कानपुर में।

वाईकाउंट बर्नम मैंने कहा था कि उसका संबंध सांप्रदायिक दंगों से है। जैसा मैंने उल्लेख किया, मैंने उसी अर्थ में समझा था कि उन्होंने नागरिक अवज्ञा आंदोलन अथवा उन सांप्रदायिक दंगों का उल्लेख नहीं किया था, जो उसके परिणामस्वरूप हुए थे।

(5)

श्री एफ. ई. जेम्स, श्री डब्ल्यू. डब्ल्यू. के. पेज, श्री टी. गाविन जोन्स, श्री जी.

ई. कफ, श्री एल. ए. रोफी, माननीय विलियम मेकरकर और

श्री एफ. डब्ल्यू. होकेनहल

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽऽः मैं केवल एक या दो प्रश्न पूछना चाहता हूं।

ऽमिनिट्स आफ एविडेंस, खंड 2-क, 29 जून 1933, पृ. 424

ऽऽवही, 4 जुलाई 1933, पृ. 476-77