11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 232

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

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सबसे पहले श्री जेम्स से एक प्रश्न, क्या आपका संगठन उस घोषणा को स्वीकार करता है, जो लार्ड इर्विन ने 29 अक्तूबर 1929 को वायसराय के पद पर आसीन रहते हुए की थी। उस घोषणा में कहा गया था कि तत्कालीन सम्राट सरकार के मत के अनुसार भारत के राजनीतिक गठन का तार्किक विकास डोमिनियन स्टेटस है? क्या आपकी एसोसिएशन इस घोषणा को स्वीकार करती है?

श्री एफ. ई. जेम्सः मुझे विश्वास नहीं कि लार्ड इर्विन का यह कथन विशेष श्वेत-पत्र में अंतर्विष्ट है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः नहीं, यह बात नहीं है।

श्री एफ. ई. जेम्सः और मेरा ज्ञापन श्वेत-पत्र के प्रस्तावों के बारे में है, किन्तु मुझे याद है कि उस कथन के समय संगठन ने एक घोषणा की थी और मैं इन समाचार-पत्र फाइलों के प्रति निर्देश करूंगा, जिसके आधार पर वह घोषणा की गई थी।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या आप उस घोषणा का सारांश हमें देंगे?

श्री एफ.ई. जेम्सः इस समय मैं उसके लिए अपनी याद्दाश्त पर भरोसा नहीं कर पाऊंगा।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं अपनी बात को कुछ भिन्न ढंग से रखना चाहूंगा, क्या आप श्वेत-पत्र में उल्लिखित प्रस्तावों को उस रूप में स्वीकार करते हैं, जो भारत के संविधान में दिए जाने चाहिए अथवा क्या आप समझते हैं कि इसका और मूल्यांकन करने की गुंजाइश है?

श्री एफ. ई. जेम्सः मैं समझता हूं कि इसका उत्तर ज्ञापन के पैरा एक में मिल जाएगा।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः उसमें उत्तर दिया गया है, क्या ऐसा नहीं है?

श्री एफ. ई. जेम्सः मेरे विचार में वही उत्तर है, ‘हम श्वेत-पत्र की सामान्य स्कीम को समग्रतः समाधानप्रद और वह युक्ति-युक्त आधार मानते हैं, जिस पर भारत का भावी संविधान आधारित होगा।’

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यदि मुझे इजाजत हो, तो मेरा प्रश्न कुछ भिन्न था। मेरा प्रश्न है कि क्या आप इन प्रस्तावों को भारत के राजनीतिक गठन का अंतिम प्रारूप मानते हैं?

श्री एफ. ई. जेम्सः आप कृपया ज्ञापन के पैरा एक का उप-पैरा (3) देखें जिसमें आपको निम्नलिखित शब्द मिलेंगे, ‘काउंसिल ऑफ दि एसोसिएशन संवैधानिक स्कीम के बारे में अपना अंतिम दृष्टिकोण निर्धारित करने का अधिकार तब तक के लिए बचाकर रखती है, जब संयुक्त प्रवर समिति की रिपोर्ट प्रकाशित हो जाए और उस रिपोर्ट पर आधारित भावी भारत सरकार के लिए विधेयक संसद में पेश हो जाए।’

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यह मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं है। मेरा प्रश्न कुछ