11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 233

216 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

भिन्न है। मेरा प्रश्न है कि क्या आप समझते हैं कि भारतीय राजनीतिक परिस्थिति के अभिवर्द्धन के लिए उन प्रस्तावों से परे कोई और गुंजाइश है, जो श्वेत-पत्र में दिए गए हैं? क्या मैंने अपनी बात स्पष्ट कर दी है?

श्री एफ. ई. जेम्सः हां। प्रकटतः श्वेत-पत्र के अंतर्गत भविष्य में उपातंरण या परिवर्तन की गुंजाइश है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैंने ‘अभिवर्द्धन’ शब्द का प्रयोग किया था।

श्री एफ. ई. जेम्सः यदि आप इसे संभवतः अभिवर्द्धन कहें।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं इस मुद्दे पर नहीं आऊंगा?

श्री एफ. ई. जेम्सः किन्तु यहां हम केवल श्वेत-पत्र के प्रस्तावों पर विचार कर रहे हैं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः पैरा 52 में आपने यह प्रस्ताव किया है कि भारतीय विधान-मंडलों के पास ब्रिटिश राष्ट्रीयता की विधि को प्रभावित करने का प्राधिकार नहीं होना चाहिए। मैं इस मुद्दे को पूरी तरह समझता हूं। इसके बाद आपका कहना है कि उसे कनेडियन अधिनियम की अनुरूपता के आधार पर भारतीय राष्ट्रीयता को भी विहित करने का प्राधिकार नहीं होना चाहिए। मैं समझता हूं कि आपका क्या कहना है, किन्तु मैं जो कुछ जानना चाहता हूं, वह यह है कि क्या उसे आप ऐसे पूर्ण प्रतिबंध के रूप में रखना चाहते हैं, जो भारतीय विधान-मंडल को किसी भी प्रयोजन के लिए भारतीय राष्ट्रिक की परिस्थिति बनाने से रोकेगी?

श्री एफ. ई. जेम्सः नहीं। मेरे विचार में वह पैरा बिल्कुल स्पष्ट है। हमारा केवल यह कहना है कि यदि भारत यह चाहता है कि विधान-मंडल इस रूप में हो, तो भारत को भारत में यूरोपीय ब्रिटिश समुदाय को छोड़कर ऐसा करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं इसे इस तरह कहता हूं, मान लीजिए, उदाहरण के लिए, ऐसा कोई मामला उठे, जो कनाडा जैसा हो जिसके कारण वह अधिनियम बना था। मान लीजिए, किसी अंतर्राष्ट्रीय अधिकरण में भारतीय प्रतिनिधित्व की आवश्यकता हो और भारत चाहे कि प्रतिनिधित्व का अधिकार सम्राट की भारतीय प्रजा के लिए आरक्षित रहना चाहिए तो आप उस स्थिति में विधान-मंडल को ऐसी विधि पारित नहीं करने देंगे, जिसमें कनेडियन अधिनियम या इस विषय के लिए दक्षिण अफ्रीकी अधिनियम की अनुरूपता के आधार पर ऐसी परिस्थिति सृजित किए जाने का उपबंध हों?

श्री एफ. ई. जेम्सः वास्तव में, इसका उत्तर हमारे पैरे का अंतिम वाक्य है। कदाचित् श्री पेज, इसे अधिक विस्तार से स्पष्ट कर सकेंगे।

श्री पेजः महोदय! मेरा विचार है कि आपको किसी भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि इसका ऐसा कोई प्रछन्न अर्थ है। इस धारा के बारे में हमारा पूर्ण उद्देश्य यह है कि हमारे मतानुसार जिसे हम भारतीय नागरिकता कहते हैं, उसके सृजन से ब्रिटिश प्रजा के