भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
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कि गवर्नर मंत्री-परिषद द्वारा दी गई सलाह से पूर्णतः बंधा है। यदि वह समझता है कि उसे सलाह की आवश्यकता नहीं है, तो वह सलाह लेने से इंकार कर सकता है। किन्तु मेरे विचार में, अगला कदम जो वह उठा सकता है, वह है दूसरी मंत्री-परिषद बनाने का जो उसे उस मत-विशेष पर समर्थन देगी, जो उसने अपनाया है यदि वह मंत्री-परिषद वही मत नहीं अपनाती, जो गवर्नर का है, तो वह विधान परिषद का विघटन कर सकता है और नए विधान-मंडल का चुनाव करा सकता है और यदि तब वह यह देखे कि नए विधान-मंडल में से मंत्री-परिषद का गठन नहीं किया जा सकता, तो उसे अवश्य झुक जाना चाहिए। क्या ऐसा नहीं है?
माननीय चार्ल्स इन्नसः जी हां, यही होगा। हां, साधारणतः यही स्थिति होगी, जब तक कि वह इसे इतना महत्त्वपूर्ण न समझे कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए।
- डा. भीमराव अम्बेडकरः श्वेत-पत्र के प्रस्तावों के अंतर्गत, क्या यह महत्त्वपूर्ण अंतर नहीं है कि श्वेत-पत्र प्रस्ताव के अंतर्गत गवर्नर किसी भी और प्रत्येक मंत्री-परिषद की सलाह को अस्वीकार करने की स्थिति में होगा?
माननीय चार्ल्स इन्नसः केवल अपने विशिष्ट उत्तरदायित्व का प्रयोग करते हुए।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या वह कभी भी किसी भी मंत्री-परिषद की सलाह से बंधा नहीं होगा?
माननीय चार्ल्स इन्नसः जहां तक हमारे पक्ष का संबंध है, हम यह मानते हैं कि भारत युक्तियुक्त सहयोग की भावना से संविधान बनाने जा रहा है। इसी प्रकार मेरे विचार में आप भी यह मानते होंगे कि गवर्नर उसी भावना से संविधान का सर्वोत्तम क्रियान्वयन करेगा, जिस भावना में सोचा गया है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः ही हां।
माननीय चार्ल्स इन्नसः मैं नहीं समझता कि आप यह धारणा क्यों बनाएं कि गवर्नर इन अधिकारों का प्रयोग करेगा। मेरे विचार में प्रत्येक गवर्नर यथा-संभव इनका प्रयोग करने से बचने का प्रयास करेगा।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुझे जैसा लगता है, मैं उन दो स्थितियों के अंतर को बताने का प्रयास कर रहा हूंः विशेष अधिकार गवर्नर को, किसी खास मंत्री-परिषद को, जिसकी सलाह से वह सहमत नहीं है, उलटने का अधिकार नहीं देते?
माननीय चार्ल्स इन्नसः मैं वास्तव में नहीं जानता कि आप क्या कहना चाहते हैं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आपके सामने जो मुद्दा मैं रखना चाहता हूं, वह यह है कि वे विशेष अधिकार, जो गवर्नर को दिए जाने हैं, वे इसलिए नहीं दिए जाने हैं कि वह किसी मंत्री-परिषद विशेष की बात नहीं माने, जिसकी सलाह उसे स्वीकार्य नहीं है, अपितु ये अधिकार इसलिए दिए जाते हैं, ताकि वह किसी भी मंत्री-परिषद की सलाह अस्वीकार कर सके?