220 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय चार्ल्स इन्नसः बिल्कुल ठीक, क्योंकि कुछ विशेष उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना है। प्रश्न किसी खास मंत्री-परिषद की बात को उलटने या न उलटने का नहीं, प्रश्न यह है कि उसे उस विशेष उत्तरदायित्व को परिरक्षित करना है अथवा नहीं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यही रक्षा उपायों में महत्त्वपूर्ण अंतर है।
माननीय चार्ल्स इन्नसः बिल्कुल यही बात मैंने कही थी कि भारत में रक्षोपायों के कुछ तथ्यों के कारण और अधिक सुनिश्चित तथा परिभाषित करना होगा। उदाहरण के लिए, इस सांप्रदायिक अशांति की स्थिति में रक्षा-उपाय आवश्यक हैं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं यह नहीं पूछ रहा हूं कि इसके लिए कोई आधार है या नहीं? मैं तो यह कहने की कोशिश कर रहा हूं कि इनमें अंतर है।
माननीय चार्ल्स इन्नसः हां।
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एसोसिएटिड चेम्बर्स ऑफ कामर्स ऑफ इंडिया की ओर से माननीय एडवर्ड
बेन्थल, माननीय थामस कैट्टो और श्री जी.एल. विंटरबाथम
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः माननीय एडवर्ड! सबसे पहले मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूं, जो संघीय वित्त विषयक आपके कथन के हिस्से के बारे में है। मैं समझता हूं (मैं नहीं जानता कि मेरा पूछना सही है या नहीं) आप भारत में एकरूप कराधान को बहुत अधिक महत्त्व देते हैं?
माननीय एडवर्ड बेन्थलः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः और उसी कारण आपने यह सुझाव दिया था कि केंद्र तथा प्रांतों के बीच राजस्व के प्रायः सभी संसाधन केंद्र में पृथक-पृथक किए जाएं और केंद्र उनका विभाजन करे? क्या ऐसा नहीं है?
माननीय एडवर्ड बेन्थलः क्या हमने यह सुझाव दिया है?
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं इसे संक्षेप में पेश कर रहा हूं कि आप चाहते हैं कि प्रायः सभी प्रमुख कर हर हालत में केंद्र द्वारा लगाए जाएं, ताकि कराधान में एकरूपता रहे?
माननीय एडवर्ड बेन्थलः हमने तो ऐसा नहीं कहा था। हमने एकरूपता चाही थी, किन्तु हमने यह नहीं चाहा कि सभी कर केंद्र द्वारा लगाए जाएं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यदि पूरे भारत में कर लगाने वाला प्राधिकरण एक न हो तो कराधान एकरूप कैसे रहेगा?
माननीय एडवर्ड बेन्थलः समन्वय का कोई ढंग खोजा जा सकता है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः उदाहरण के लिए, मान लीजिए, हमने यह सिद्धांत
ऽमिनिट्स आफ ऐविडेंस, खंड 2-क, 13 जुलाई 1933, पृ. 640-642