222 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
स्वायत्तता की दृष्टि से असंगत न हो?
माननीय एडवर्ड बेन्थलः हां पहले एक प्रश्न के उत्तर में मैंने कहा था कि जरूरत से ज्यादा समवर्ती शक्तियां नहीं होनी चाहिए और हम उससे सहमत हैं। विषयों का और करों का विभाजन यथा-संभव सुस्पष्ट होना चाहिए। किन्तु व्यापार के दृष्टिकोण से हम यह कहना चाहते हैं कि अंतर-प्रांतीय सीमा-अवरोध इन उपबंधों से कैसे अंतर-प्रांतीय सीमा-अवरोध पैदा हो सकते हैं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अब मैं आपसे पैरा 3 में निर्दिष्ट रिजर्व बैंक के बारे में एक प्रश्न पूछना चाहता हूं। आपका कहना है कि बैंक राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होना चाहिए?
माननीय एडवर्ड बेन्थलः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मेरा अनुमान है कि आप इस बात से सहमत होंगे कि संकट के समय बैंक के लिए राजनीतिक मदद की आवश्यकता होगी?
माननीय एडवर्ड बेन्थलः ऐसा हो सकता है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यह संकट में आवश्यक हो सकता है, ताकि सरकार से अधिस्थगन की घोषणा कराने के लिए बैंक को समर्थन दिया जा सके?
माननीय एडवर्ड बेन्थलः हां। मेरे विचार में वित्तीय संकट की स्थिति में सरकार द्वारा हस्तक्षेप की अंतिम शक्ति की इजाजत देना सभी बैंकों के संविधानों में परंपरागत तौर पर है और मैं रिजर्व बैंक के मामले में इस पर आपत्ति नहीं करूंगा।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अतः यदि सरकार संकट के समय अधिस्थगन के रूप में या धन उधार देकर बैंक की मदद करे, ताकि उसकी आरक्षित निधि को स्थायित्व प्रदान किया जा सके, जिससे कि वह आगे काम कर सके, तो क्या आप उसका बैंक पर और उसके काम-काज पर कुछ प्रभाव होने देना चाहेंगे?
माननीय एडवर्ड बेन्थलः किसी न किसी रूप में सरकार बैंक के कुछ अधिकारियों की और कुछ निर्देशकों की नियुक्ति करेगी, किन्तु सरकार को अधिसंख्य निदेशकों की नियुक्ति नहीं करनी चाहिए।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं इस मुद्दे को स्पष्ट करना चाहता हूं। मैं इसमें यह अंतर करता हूं-राजनीतिक दखल, हस्तक्षेप और प्रभाव। आप इनमें से कौन-सा चाहेंगे, जिसे सरकार करे और जिसे वह न करे।
माननीय एडवर्ड बेन्थलः इसे परिभाषित करने का अर्थ होगा, रिजर्व बैंक का संविधान तैयार करना।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं इस बात को और आगे नहीं बढ़ाऊंगा। निदेशकों के बारे में, आप राजनीतिक प्रभाव को अलग करने के लिए किस प्रकार की व्यवस्था