11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 240

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

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सोचते हैं? उदाहरण के लिए, क्या आप यह कहेंगे कि जो व्यक्ति भारत में किसी राजनीतिक दल से संबंधित हो वह निर्देशक होने के योग्य नहीं है?

माननीय एडवर्ड बेन्थलः नहीं, प्रारंभ में मैं एक शेयरधारक बैंक रखूंगा और वे शेयरधारक निर्देशकों के बहुमत को नामजद करेंगे।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः वे राजनीतिज्ञ भी हो सकते हैं?

माननीय एडवर्ड बेन्थलः वे राजनीतिज्ञ नहीं, जो विधान-मंडलों में बैठे हों।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः लेकिन हो सकता है, वे पार्टी कोष में अति सक्रिय सहयोग दे रहे हों।

माननीय एडवर्ड बेन्थलः यदि वे अति सक्रिय रूप से दलगत राजनीति में भाग ले रहे हों, तो वे देश का वित्तीय विश्वास प्राप्त नहीं कर पाएंगे।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः किन्तु ऐसे व्यक्तियों को नियुक्त किए जाने के लिए क्या कोई अयोग्यता नहीं होगी?

माननीय एडवर्ड बेन्थलः यदि वे एक साथ दो काम करेंगे, तो यह बहुत मूर्खतापूर्ण काम होगा।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः अब श्वेत-पत्र के पैरा 122 पर आपकी टिप्पणी के बारे में। पैरा पांच में, आपने प्रस्ताव 122 पर कुछ योग्यताएं शामिल करने के सुझाव दिए हैं?

माननीय एडवर्ड बेन्थलः हां।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं उस पैरा की अंतिम चार-पांच पंक्तियां पढ़ना चाहता हूं, ‘लेकिन इस प्रयोजन के लिए कोई भी विधि केवल इस आधार पर विभेदकारी नहीं समझी जाएगी कि वह पूर्णतः या अपवादस्वरूप किसी भी क्षेत्र में कृषि भूमि का विक्रय या बंधक, ऐसे किसी व्यक्ति को जो उस वर्ग के नहीं हैं, जिसे उस क्षेत्र में कृषि में लगे हुए अथवा उससे संबद्ध व्यक्तियों के वर्ग के रूप में मान्यता प्राप्त है, निषिद्ध करती है।’ मैं जो कुछ कहना चाहता हूं, वह यह है कि जब तक कि इस बाद वाले अंश में ‘जाति, पंथ या धर्म के अंतर के बिना’ शब्द अंतर्स्थापित नहीं कर दिए जाते, तब तक यह संभावना रहेगी कि जाति, पंथ या धर्म के आधार पर वर्ग के अंतर्गत भी विभेद किया जाए। आपके समक्ष एक किसान वर्ग हो सकता है और उस किसान वर्ग के भीतर आप जाति, पंथ या धर्म में अंतर कर सकते हैं?

माननीय एडवर्ड बेन्थलः हां। मैं चाहूंगा कि वकील इस मुद्दे पर विचार करें।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मेरा आपसे यह प्रश्न पूछने का कारण यह है कि आपने इस खंड के सुधार के बारे में यह कहते हुए कुछ सुझाव दिए हैं, ‘यदि इस प्रस्ताव को प्रभावी रूप दिया जाना है, तो ब्रिटिश भारत में अधिवास, निवास की निरंतरता या