भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
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परिणाम यह होगा कि निर्वाचक सूची में भारतीय समाज के एक ही वर्ग से स्त्रियां आएंगी?
लेडी लेटनः ऐसा ही है। मैं साथ में यह भी कहूंगी कि यदि प्रशासनिक दृष्टि से यह संभव हो, तो हमें इस बात का स्वागत करना चाहिए और अपने ज्ञापन में हमने इस बात पर जोर भी दिया है कि कम संपत्ति की योग्यता वाली पत्नियों को भी मताधिकार दिया जाना चाहिए, न कि केवल अधिक संपत्ति की योग्यता वाली पत्नियों को ही।
ग 70. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं जो बात कहने को आतुर हूं, वह यह है - क्या आप उस मुद्दे को महत्त्व देते हैं, जो मैंने आपके सामने रखा है, अर्थात् पूरी जनसंख्या में स्त्रियों की जनसंख्या का ठीक-ठीक अनुपात में वितरण, अथवा क्या आप महिला मतदाता के प्रतिकूल पुरुष मतदाता के अनुपात को ही महत्त्व देती हैं?
लेडी लेटनः इन दोनों पक्षों को महत्त्व देती हूं, किन्तु हमारा विचार है कि फिलहाल स्त्रियों के हित इस मामले में पर्याप्त सुरक्षित हैं। यदि आप दूसरी स्त्रियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए, अर्थात् उन स्त्रियों का जिन्हें मताधिकार प्राप्त नहीं है, सभी जिलों में बहुत बड़ी संख्या में स्त्रियों को मताधिकार देते हैं, तो हम चाहेंगे कि वह यथा-संभव कम हो, और यदि उसे किसी स्थान पर निश्चित कर दिया जाता है, तो हम चाहेंगे कि इसे जितना जल्दी संभव हो वहां से हटाया जाए। हम स्वयं निश्चय ही यह चाहती हैं कि इसे यथा-संभव कम रखा जाए। यदि व्यावहारिक दृष्टि से संभव है, तो हम वयस्क मताधिकार की मांग करने के लिए तैयार रहेंगी, लेकिन हम यह जानती हैं कि प्रशासनिक दृष्टि से ऐसा संभव नहीं है।
ग 71. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या मैं इसी मुद्दे के बारे में कुछ भिन्न ढंग से पूछ सकता हूं? निस्संदेह सभी स्त्रियां समाज कल्याण के मामलों में रुचि रखती हैं। यह बिल्कुल सच है। स्त्रियों का दृष्टिकोण पूरी तरह एक-सा हो सकता है, किन्तु आप यह भी महसूस करेंगी कि समाज कल्याण की योजनाओं के लिए बहुत धन चाहिए, यदि उन्हें पूर्णतः क्रियान्वित करना है, तो उसके लिए कर लगाने होंगे?
लेडी लेटनः हां। मैं पूरी तरह समझती हूं कि ऐसा करना होगा।
ग 72. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः और हो सकता है इस बारे में सभी स्त्रियों का दृष्टिकोण एक सा न हो। संभव है जिस वर्ग से वे आई हैं, उनके आधार पर वे बंट जाएं?
लेडी लेटनः हां, मैं आपको इसके दो उत्तर दे सकती हूं। सबसे पहले शिक्षा का दृष्टिकोण लीजिए। यदि आपके पास शिक्षा के लिए कुछ धन आवंटित करने के लिए है, तो हर वर्ग की स्त्रियां इस बात पर सहमत होंगी कि वह राशि स्त्री-पुरुष, दोनों पर बराबर खर्च की जाए। जबकि यदि स्त्रियां न मिलें जो काफी भार सहन कर सकें, तो आप लड़कियों की अपेक्षा लड़कों पर ज्यादा खर्च करेंगे। पहले तो यह भी एक ऐसी बात है, जिसे देखना होगा। साथ ही, मैं यह भी कहूंगी कि सभी वर्गों की महिलाएं, जो