11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 243

226 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कल्याण में कुछ भी सक्रिय रुचि ले रही हैं, इस बात पर जोर दे रही हैं कि शिक्षा पर अधिक अनुपात में धन खर्च किया जाए। मैं समझती हूं कि आप इस समय इस आधार पर अधिसंख्य वर्गों की महिलाओं पर सुनिश्चित रूप से विश्वास कर सकते हैं, लेकिन यदि मताधिकार ज्यादा से ज्यादा निकट लाया जाए तो मुझे खुशी होगी और इसलिए मैं साक्षरता की योग्यता को खास महत्त्व देती हूं। और ऐसी कोई भी स्त्री जो इतनी समझदार है कि इस भार को वहन करने का महत्त्व समझती है, उचित समय के भीतर अपने आपको साक्षर बना सकती है और यदि आप साक्षरता की योग्यता रखेंगे, और स्त्रियों का कोई भी वर्ग यह महसूस करता है कि स्त्रियों का वह वर्ग, जिसे मताधिकार प्राप्त हो सकता है, मतों का अधिकार नहीं ले रहा, जो कि उनके हाथ में एक हथियार है, और इसी कारण मैं हमेशा साक्षरता की प्रबल समर्थक रही हूं और यही कारण है कि भारत की सभी संगठित महिलाएं भी साक्षरता के पक्ष में हैं।

ग 73. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः जहां तक आप मेरे दृष्टिकोण को समझते हैं, मेरा समाधान हो गया है। माननीय फिलिप हार्टोग, मैं आपसे साक्षरता के बारे में एक प्रश्न पूछना चाहता हूं। हमें वास्तव में इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि स्त्रियों के लिए मताधिकार की कसौटी के रूप में साक्षरता की योग्यता अपनाने के खिलाफ बताई गई क्या-क्या प्रशासनिक कठिनाइयां हैं। लेकिन मैं जो कठिनाइयां समझ पाया हूं, वे हैं, सबसे पहले यह सुझाव दिया गया है कि ऐसे कोई प्रमाण-पत्र उपलब्ध नहीं हैं, जो रजिस्ट्रीकरण अधिकारी का सहसा ही यह समाधान करा देने में समर्थ हों कि अमुक स्त्री साक्षरता के अपेक्षित वर्ग के अंतर्गत आती है और इसीलिए तत्काल नामावली में उसका नाम दर्ज किया जाए। ऐसी स्थिति में हमें प्रस्तावों में सुझाई गई प्रक्रिया अपनानी होगी कि ग्राम अधिकारी जांच-पड़ताल करें और उनके प्रमाण-पत्र पर तहसीलदार प्रतिहस्ताक्षर करें। मेरे विचार में जो प्रशासनिक कठिनाई बताई गई है, वह यह है कि ग्राम अधिकारी यह जानने के लिए गांव में किसी स्त्री के पास कैसे जाएगा कि वह साक्षर है या नहीं? क्या आप इसके लिए उस स्त्री पर निर्भर करना चाहते हैं, जो मताधिकार प्राप्त करना चाहती है, कि वह आगे आए और आवेदन करे?

माननीय फिलिप हार्टोगः मेरा विचार है कि यही एकमात्र संभव उपाय है। उसे स्वयं या अपने पति की मार्फत यह कहने के लिए पर्याप्त रुचि दिखानी होगीः ‘मेरी इच्छा है कि मेरा नाम सूची में दर्ज कर लिया जाए। मैं साक्षर हूं और परीक्षा देने के लिए तैयार हूं।’

ग 74. श्री बटलरः यह आवेदन से कैसे भिन्न है?

लेडी लेटनः मैं नहीं समझती कि हमने अपने ज्ञापन में साक्षरता के मुद्दे पर आवेदन पर कोई आपत्ति की है, हमें कोई आपत्ति नहीं है। हमारा विचार है कि जो लोग किसी भी ऐसी शैक्षिक योग्यता के लिहाज से साक्षर माने जाते हैं जो स्वीकृत हैं, स्वतः मतदाता सूची में दर्ज कर लिए जाने चाहिए। इसके अलावा, आवेदन किया जाना चाहिए।