11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 246

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

अधिकारी के लिए इन वार्डों में घुसकर जांच-पड़ताल करना संभव है?

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श्रीमती हामिद अलीः जहां तक बंबई का संबंध है, हां। मैं नहीं समझती कि बंबई में कोई आपत्ति करेगा, क्योंकि बंबई में प्रायः नगरपालिका के चुनाव होते रहते हैं और वहां लोग इस तरह की बातों के अभ्यस्त हैं।

ग 352. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः संघीय विधान-मंडल में स्त्रियों के प्रतिनिधित्व के बारे में अनुपूरक वक्तव्य संख्या 56 में क्या कहा गया है, मैं ठीक से नहीं समझ पाया? उसमें कहा गया है, ‘हमने बराबर कहा है कि हम नहीं चाहते कि हमारे एकीकृत वर्गों में सांप्रदायिकता की बुराई प्रवेश करे, आप देखेंगे कि श्वेत-पत्र का वह प्रस्ताव जहां तक निचले सदन में स्त्रियों के प्रतिनिधित्व का संबंध है, सांप्रदायिक निर्वाचक-मंडलों द्व ारा नहीं, बल्कि एकल संक्रमणीय प्रणाली अथवा साधारण निर्वाचक-मंडल द्वारा निर्वाचन करने का है।

राजकुमारी अमृत कौरः हां।

ग 353. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इस दृष्टिकोण से मुझे यह सोच लेना चाहिए था कि सांप्रदायिक निर्वाचक-मंडल होने के आधार पर इसपर आपत्ति नहीं की जा सकती?

राजकुमारी अमृत कौरः पहली बार में तो संघीय विधान-मंडल के निचले सदन में स्त्रियों के लिए स्थान निश्चित रूप से सांप्रदायिक आधार पर आरक्षित होंगे। इस मुद्दे पर हमारे पास भारत मंत्री की स्पष्ट उक्ति है, जो उन्होंने परसों या तीन दिन पहले अपने साक्ष्य में व्यक्त की थी। संघीय विधान-मंडल के निचले सदन में वे आरक्षित स्थान जिनका निर्वाचन की अप्रत्यक्ष प्रणाली में उल्लेख है, निश्चित रूप से सांप्रदायिक आधार पर होंगे।

ग 354. श्री एम.आर. जयकरः आपकी आपत्ति सांप्रदायिक आधार पर स्थानों के आरक्षण के बारे में है?

राजकुमारी अमृत कौरः हां! और इसके अलावा विधान-मंडलों द्वारा उन स्थानों के लिए निर्वाचन की अप्रत्यक्ष प्रणाली के बारे में है, जो वर्तमान में प्रस्तावित संविधान के अनुसार सांप्रदायिक आधार पर होगी।

कुमारी मेरी पिकफोर्डः क्या मैं बीच में बोल सकती हूं। भारत मंत्री के उत्तर में जब उन्होंने यह कहा कि सांप्रदायिक प्रश्न अंतर्ग्रस्त हैं, तो वह बंगाल की प्रांतीय परिषद में स्त्रियों के स्थानों की ओर इंगित कर रहे थे। वह विधान-मंडल में स्थानों की ओर संकेत नहीं था।

ग 355. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यही मैंने सोचा था। साक्षी कृपया श्वेत-पत्र परिशिष्ट II के पृष्ठ 89 पर ध्यान दें। मुझे यह सोच लेना चाहिए था कि वह मामला हमेशा-हमेशा के लिए तय हो चुका है। आपने भी उसकी ओर संकेत किया है, ‘प्रत्येक प्रांत में जहां किसी को स्थान आवंटित किए जाएं, स्त्रियों के स्थानों के लिए निर्वाचन प्रांतीय