भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
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परिषदें, जो सांप्रदायिक आधार पर बनने जा रही हैं, स्वभावतः उस सांप्रदायिक प्रश्न को उन महिलाओं तक ले जाएंगी, जिन्हें वे निर्वाचित करेंगी।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यह सच है, लेकिन मैं एक दूसरा सवाल करना चाहता हूं। मैं आपकी आपत्ति अच्छी तरह समझता हूं कि प्रांतीय विधान परिषदों में विभिन्न समुदायों के भिन्न-भिन्न प्रतिनिधियों को लेने से स्त्रियों के चुनाव में एक तात्विक विचार घर कर जाएगा।
ग 383. श्री एम.आर. जयकरः अप्रत्यक्ष चुनाव के बारे में यह आपकी आपत्तियों में से केवल एक है, लेकिन मैं समझता हूं कि एक दूसरी आपत्ति भी इसी आधार पर है कि यह अप्रत्यक्ष है?
राजकुमारी अमृत कौरः मैं कई बार ऐसा कह चुकी हूं।
ग 384. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः सवाल यह है। उदाहरण के लिए, आप अपने ही प्रत्यक्ष निर्वाचन-क्षेत्र को लें, या किसी भी निर्वाचन-क्षेत्र को ले लें, जैसे बंबई शहर को ही ले लें, उसी निर्वाचन-क्षेत्र में, जिसे आप चाहेंगी कि वह निचले सदन में महिला प्रतिनिधि के चुनाव के लिए खास तौर पर बनाया जाए, आपको विभिन्न समुदायों के स्त्री और पुरुष, दोनों प्रकार के मतदाता मिलेंगे?
राजकुमारी अमृत कौरः हां।
ग 385. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या आपका तात्पर्य यह सुझाव देना है कि जो मतदाता स्त्री प्रतिनिधि के चुनाव में भाग लेंगे वे उन प्रतिनिधियों की अपेक्षा कम संप्रदायमुखी होंगे, जो प्रांतीय विधान परिषदों में उन बड़े-बड़े समुदायों के होंगे, जो अप्रत्यक्ष आधार पर महिला अभ्यर्थी के चुनाव में भाग ले रहे होंगे?
राजकुमारी अमृत कौरः बेशक, क्योंकि सांप्रदायिकता का सवाल जन-साधारण की अपेक्षा उस प्रकार के लोगों में कहीं ज्यादा होता है, जो विधान-मंडल में आते हैं।
ग 386. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः लेकिन मैं आपका ध्यान इस तथ्य की ओर दिलाना चाहता हूं कि ये निर्वाचक-मंडल ही उन लोगों का चुनाव करेंगे, जो अप्रत्यक्ष चुनाव में मतदाता होंगे?
राजकुमारी अमृत कौरः हो सकता है, लेकिन जब सवाल संयुक्त निर्वाचक-मंडल का हो और हम संयुक्त निर्वाचक-मंडलों के मत प्राप्त करने जा रहे हों, तो सांप्रदायिकता का सवाल उतना विद्यमान नहीं रहेगा - वह हो भी नहीं सकता - जितना एक प्रांतीय परिषद में होता है, जो पृथक-पृथक निर्वाचक-मंडलों द्वारा चुनी गई हो और जहां सांप्रदायिकता का सवाल बना रहता है और पूरी तरह रहना भी चाहिए।
ग 387. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या आप समझती हैं कि साधारण निर्वाचक-मंडल में भारत में स्त्री-पुरुष सांप्रदायिक ढंग से काम नहीं करते?
राजकुमारी अमृत कौरः जन-साधारण में निश्चित रूप से नहीं।