11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 251

234 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

ग 388. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या आपने कभी मतदान होते देखा है?

राजकुमारी अमृत कौरः हां, हमने अपने संगठन की एक महिला सदस्य के मामले में हाल ही का उदाहरण देखा है। उसने संयुक्त निर्वाचक-मंडल से बंबई में सर्वाधिक मत प्राप्त किए और व्यावहारिक रूप से एक भी स्त्री नहीं, सबके सब पुरुष, दलित वर्ग और हरेक ने मतदान किया था और उसने सर्वाधिक मत प्राप्त किए थे। यह नगरपालिका के चुनाव का एक उदाहरण है। वह अकेली महिला नहीं थी, एक दूसरी महिला भी थी। पटना में विश्वविद्यालयों के चुनावों के उदाहरण भी हमारे पास हैं। जहां पुरुषों ने स्त्रियों को चुना और सांप्रदायिकता के सवाल को लेकर कोई कठिनाई नहीं हुई।

ग 389. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः जब मुद्दा यह हो कि क्या महिला चुनी जाएगी, तो निस्संदेह सांप्रदायिक भावना अप्रत्यक्ष चुनाव की अपेक्षा प्रत्यक्ष चुनाव में कम होगी?

राजकुमारी अमृत कौरः निश्चय ही, जब कभी अप्रत्यक्ष चुनाव परिषद के माध्यम से हो रहा होगा, तो यह संप्रदायवाद से व्याप्त होगा।

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ग 406. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इन परिषदों में जहां वास्तव में महिलाएं सदस्य हैं, वहां मैं समझता हूं, वे नामजद की गई हैं?

राजकुमारी अमृत कौरः हां, चुनाव जैसी कोई चीज नहीं है।

ग 407. माननीय हरी सिंह गौड़ः विधान सभा में वे कभी नामजद नहीं की गई हैं?

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः कभी नहीं।

ग 408. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या कोई अनर्हता है?

राजकुमारी अमृत कौरः मेरे विचार में नहीं।

श्रीमती हामिद अलीः क्या इस बारे में मैं यह कह सकती हूं कि देशी राज्यों के शासकों ने इस अनर्हता को हटा दिया है।

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यह अभी हाल में हुआ है_ कुछ प्रांतों में तो अभी हाल ही में हुआ है कि इस अनर्हता को हटाए जाने के बाद दूसरे चुनाव के लिए मुश्किल से समय मिला है।

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श्रीमती पी.के. सेन और श्रीमती एल. मुखर्जी

ग 588. डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः क्या यह निष्कर्ष निकाला जाए कि यदि महिलाएं व्यवसायों में प्रवेश करेंगी, तो उनमें इस प्रकार के सांप्रदायिक भेदभाव का फैलना बहुत

ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2ग, 29 जुलाई 1933, पृ. 2327