भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
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मत देंगी - एक संयुक्त निर्वाचन-क्षेत्र जिसमें यह शर्त रखी जाए कि कम से कम एक स्थान मुस्लिम स्त्री के लिए आरक्षित किया जाए?
श्रीमती पी.के. सेनः वे सभी मुसलमान महिला को मत देंगे।
ग 619. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं जानता हूं कि आप संभवतः इतनी उदार होंगी कि आप और अधिक स्थान दे सकती हैं। क्या आप इस बात को अनुमोदित करने को तैयार होंगी कि कानून द्वारा यह व्यवस्था कर दी जाए कि एक स्थान मुसलमान स्त्री के लिए आरक्षित किया जाए?
श्रीमती पी.के. सेनः हां, पहले से ही ऐसा है और हमें यह स्वीकार करना होगा।
ग 620. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः वह पृथक निर्वाचक-मंडल के आधार पर हो सकता है, यह नहीं बताया गया है कि कैसे होगा? इसलिए मैं इस मामले में आपकी राय लेना चाहता था। मद्रास में इन 6 स्थानों को भरे जाने के बारे में विस्तृत उपबंध श्वेत-पत्र में दिखाई नहीं पड़ते?
श्रीमती पी.के. सेनः स्त्री-पुरुषों का एक संयुक्त निर्वाचक-मंडल होना चाहिए।
ग 621. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मुझे नहीं पता। कम से कम श्री बटलर इस बात पर प्रकाश डाल सकते हैं कि ये 6 स्थान कैसे भरे जाने हैं?
श्रीमती एल. मुखर्जीः यदि सांप्रदायिक भेदभाव से बचा जा सके, तो हम इसे नहीं चाहते।
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं आपकी बात अच्छी तरह समझ गया। मैं आपसे पूछ रहा हूं कि क्या आप इस सीमा तक अपनी आपत्ति को नरम करने के लिए तैयार हैं कि एक स्थान आरक्षित करते हुए आप संयुक्त निर्वाचक-मंडल बनाएंगे, जिससे कि सांप्रदायिक संतुलन न बिगड़े।
श्री बटलरः मैं समझता हूं कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर इसे बना लेंगे। ‘विशेष समितियों के स्थानों के लिए निर्वाचन-क्षेत्रों में प्रस्तुत की जाने वाली निश्चित निर्वाचन मशीनरी अभी भी विचाराधीन है।’
डॉ. भीमराव अम्बेडकरः इसलिए मैं यह पूछ रहा था कि क्या ये स्थान साधारण निर्वाचन क्षेत्र में स्त्रियों के पृथक निर्वाचन-मंडलों द्वारा भरे जाएंगे। यहां यह बात स्पष्ट नहीं की गई है। मुझे नहीं पता कि यह कैसे किया जाए, क्योंकि मैंने पृथक शीर्षों के अंतर्गत आवंटित स्थानों की सारणी में यह पाया है। ‘साधारण’ के अंतर्गत 6 महिला स्थान ‘मुसलमान’ के अंतर्गत एक स्थान, इससे मेरी यह धारणा बनती है कि आप केवल मुस्लिम स्त्रियों के लिए ही पृथक निर्वाचक-मंडल रखेंगे जिसका परिणाम यह होगा कि पुरुष 28 होंगे और स्त्री एक। मुझे मालूम नहीं, मैं इस मुद्दे पर जानकारी चाहता हूं।
ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2ग, 31 जुलाई 1933, पृ. 1356-61