11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 256

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

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गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना शुरू किया था और यह कि मैंने भी यह समझ कर इस विचार-विमर्श में भाग लेने की सम्मति दी थी कि पूना समझौता एक स्वीकृत प्रस्ताव है। निस्संदेह, माननीय नृपेन्द्र सरकार द्वारा तथ्यों को समिति के समक्ष रखे जाने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि मैं जानता हूं कि मुझे भी भूल-सुधार का अवसर मिलेगा। लेकिन जहां तक मेरी अपनी स्थिति का संबंध है, मैं नहीं समझता कि मेरे लिए समिति की कार्यवाहियों में और आगे भाग लेना संभव होगा, यदि उदाहरण के लिए, दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व के बारे में संपूर्ण प्रश्न फिर से उठाया जाता है तो।

माननीय एन.एन.सरकारः अध्यक्ष महोदय! मैं आपकी अनुमति से इस अवसर पर प्रधानमंत्री को भेजा गया अपना निम्नलिखित पत्र और माननीय रवीन्द्रनाथ टैगोर का 27 जुलाई 1933 का तार प्रस्तुत करना चाहता हूंः

प्रधानमंत्री को माननीय एन.एन. सरकार का पत्र

सें. जेम्स कोर्ट,

बकिंघम गेट,

लंदन, एस.डब्ल्यू.आई.

14 दिसंबर 1932

प्रिय प्रधानमंत्री जी,

मैं आपके अनुरोध पर आपकी सेवा में कुछ तार भेज रहा हूं। बंगाल विधान परिषद के 25 सदस्यों का पहला तार इस प्रकार हैः

बंगाल विधान परिषद के 25 सदस्यों का प्रतिवेदन। पूना दलित वर्ग समझौता बंगाल

के हिंदुओं से संपर्क किए बिना किया गया। शेष भारत की तरह बंगाल में कोई

दलित वर्ग समस्या नहीं है, जैसा कि लोथियन समिति ने ध्यानपूर्वक छानबीन

के बाद पाया। अम्बेडकर और अन्य लोगों को बंगाल की स्थितियों के बारे में

कोई प्रत्यक्ष जानकारी नहीं है। बंगाल में अभिकथित दलित वर्ग किसी राजनीतिक

अनर्हता से ग्रस्त नहीं है। पूना समझौते द्वारा आमूल परिवर्तन, बंगाल में हिंदू समाज

के सामान्य विकास के आधार पर प्रहार है। बंगाल के संबंध में पूना समझौते में

ईमानदारी से संशोधन करने की आवश्यकता है, क्योंकि लोथियन समिति योजना

में बंगाल की स्थिति को भली-भांति समझा गया है।

‘बी.सी. चटर्जी, एस.एम. बोस, महाराजा दीनाजपुर, महाराजा कोशिमबाजार, राजा बहादुर

नरसिंहपुर, नरेन्द्र कुमार बसु, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, राय बहादुर, कामिनी कुमार दास,

सत्येन्द्र कुमार दास, केशव चन्द्र बनर्जी, हरीधन दत्त, सतीश चन्द्र मुखर्जी, शरत चन्द्र

मित्र, आनन्द मोहन पोद्दार, सतीश चन्द्र, राय चौधरी, हनुमान प्रसाद पोद्दार, किशोरी

मोहन चौधरी, सत्य किंकर सहाना, क्षेत्र मोहन राय, देव राय महषी, शांति शेखरेश्वर

राय, शरत कुमार राय, पी. बनर्जी, सुरेन्द्र नाथ लॉ, शेलेश्वर सिंह राय’।