11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 257

240 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. मैंने उपर्युक्त तार डॉ. अम्बेडकर को दिखाया था। उन्हें भी एक तार मिला था, जिसकी प्रतिलिपि इस प्रकार हैः

‘बंगाल के बारे में। बंगाल के संबंध में पूना समझौते के पुनरीक्षण के लिए हिंदू

मित्रों का तार। उन्होंने दो बार चूक की । एक बार लोथियन समिति के सामने, जब

वे दलित वर्गों की सूची देने में नाकाम रहे। दूसरे, जब बंबई में सितम्बर माह में

आयोजित सम्मेलन में बुलाए गए और कोई भी नहीं आया। अब वे मिथ्या हो-हल्ला

मचाते हैं। इसके अलावा नामशूद्रों द्वारा सारे स्थानों को हड़पने का उन्हें व्यर्थ में

भय है। साथ ही लोथियन खंड दो के अनुसार, बंगाल सरकार दलित जनसंख्या

के आंकड़े 103 लाख हैं, जबकि लोथियन के अनुसार, हमने स्थानों की गणना

के लिए 75 लाख माने थे, पूना समझौता लोथियन सिफारिशों के तुरंत बाद हुआ,

देखिए मलिक का टिप्पण-लोथियन खंड 2, कलकत्ता में ठक्कर ने व्यापक हिंदू

भावना समझौते के पक्ष में पाई। इस प्रकार मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित समझौते का

पुनरीक्षण नहीं किया जा सकता।’

- बिड़ला और ठक्कर

  1. मुझे अन्य दो तार भी मिले हैं, जो इस प्रकार हैंः

‘अम्बेडकर के नाम बिड़ला का तार। बिड़ला बंगाल की परिस्थितियों से परिचित

नहीं हैं और उनका वहां बिल्कुल भी प्रतिनिधि स्वरूप नहीं है। बंगाल में दलित वर्गों

को 30 स्थान देने में पूना समझौता न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। यह संख्या

मद्रास को दिए गए स्थानों के बराबर है। बंगाल में दलित वर्गों का प्रश्न निश्चय

ही बहुत विषम नहीं है और अन्य प्रांतों से पूरी तरह भिन्न है। बंगाल इस सवाल

पर प्रधानमंत्री के निर्णय को ही सबसे ज्यादा मान सकता है।’

‘सतीश चन्द्र सेन, विजय कुमार बसु, सत्येन्द्र चन्द्र घोष मलिक, अमर नाथ दत्त,

सत्येन्द्र चन्द्र मित्र, सत्यचरण मुखर्जी, सत्येन्द्र नाथ सेन, जगदीश चन्द्र बनर्जी, नव

कुमार सिंह दुधोरिया केंद्रीय विधान-मंडल में उपस्थित बंगाल के गैर-मुस्लिम

प्रतिनिधि’

- अमर नाथ दत्त

‘बंगाल विधान परिषद के सदस्य जिन्होंने पहले तार दिया था, कहते हैं कि बिड़ला और ठक्कर के तार में गलत बयानी की गई है। बंगाल के प्रतिनिधियों को पूना समझौते को जन्म देने वाले सम्मेलन में नहीं बुलाया गया। उसकी शर्तों से बंगाल आश्चर्यचकित। उससे सहमत नहीं, प्रधानमंत्री के फार्मूले के अनुसार समझौते से बंगाल आबद्ध नहीं हो सकता। लोथियन समिति ने जांच की थी कि कौन-सी जातियां बंगाल में अछूत और अगम्य हैं। हिन्दू और मुसलमानों से युक्त प्रांतीय मताधिकार समिति का सही उत्तर। रिपोर्ट खंड 2, मलिक का टिप्पण समिति के समक्ष पेश नहीं, लेकिन गुप्त रूप से तैयार। बंगाल के दलितों का मलिक द्वारा वर्गीकरण अन्य प्रांतों से भिन्न जिनके अंतर्गत सवर्ण