11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 262

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

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हूं कि वस्तुतः उनका प्रतिनिधित्व हुआ था और सर्वश्री ठक्कर तथा बिड़ला के तार में उनका यह कथन, ‘बंगाल के हिंदुओं ने निमंत्रण के बावजूद उसमें भाग नहीं लिया’, जिसके आधार पर श्री एन.एन. सरकार ने जांच के लिए अपना तर्क पेश किया है, सही नहीं है। इससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण ध्यान में रखने की बात यह है कि बंगाल के ये प्रतिनिधि मौन दर्शकों की भांति केवल उपस्थित ही नहीं थे, बल्कि वे बातचीत में सक्रिय भागीदार थे। मुझे अच्छी तरह याद है कि उनमें से एक बंबई में मेरे पास आया था और वह राजा पार्टी के बंगाल दलित वर्ग के एक युवा के साथ था और उसने मेरे साथ लगभग डेढ़ घंटा निजी तौर पर बातचीत की थी, जिसके दौरान उसने मुझसे कहा था कि संयुक्त निर्वाचक-मंडलों के आधार पर सवर्ण हिंदुओं के साथ समझौता कर लिया जाए। इसलिए यह कहना बिल्कुल गलत है कि बंगाल के सवर्ण हिंदुओं का प्रतिनिधित्व नहीं हुआ था और सर्वश्री ठक्कर तथा बिड़ला के कथन में जो अशुद्धता है, वह इस कारण है कि बातचीत के समस्त विवरण की जानकारी रखना असंभव है, जो अंतर्ग्रस्त मुद्दों के महत्त्वपूर्ण स्वरूप को ध्यान में रखते हुए क्षम्य है। मुझे खेद है कि मैं बंगाल के उस सवर्ण हिंदू सज्जन का नाम बताने की स्थिति में नहीं हूं, जिसने मेरे साथ बातचीत की थी, लेकिन मैं भारत लौटते ही उसका नाम आपको दे दूंगा।

अतः बंगाल के सवर्ण हिंदुओं की ओर से पूना समझौते पर नए सिरे से विचार करने का कोई मामला नहीं बनता। जहां तक दलित वर्गों का संबंध है, उनके प्रवक्ता श्री एम.बी. मलिक ने मुझे तार भेजा है कि वे पूना समझौते को स्वीकार करते हैं। उनका तार और सर्वश्री ठक्कर और बिड़ला का तार आपकी सूचनार्थ मूल रूप में संलग्न है। मैं अगले सप्ताह भारत आ रहा हूं। इस विषय में यदि आप मुझे कोई सूचना देना चाहें, तो वह मेरे बंबई के पते पर भेजी जाए, जो कि आपकी सुविधा के लिए मैं नीचे दे रहा हूं।

दामोदर हाल, परेल,

बंबई-12, (भारत)

आपका

ह./-

डॉ. भीमराव अम्बेडकर

तारीख 1 दिसंबर 1932 का तार

1774 दिल्ली - 118.29.2020

डी.एल.टी. डॉ. अम्बेडकर, इंडिया ऑफिस, लंदन

बंगाल के लिए पूना समझौते के पुनरीक्षण के लिए बंगाल के हिंदू मित्रों के तार के बारे में, वे दो बार चूकें, एक बार लोथियन समिति के सामने जब वे दलित वर्गों की सूची

ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ग, 31 जुलाई 1933, पृ. 1425-34