246 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
नहीं दे पाए और दूसरे उस समय अब बंबई में सितंबर के सम्मेलन में आमंत्रित किए जाने पर किसी ने भी भाग नहीं लिया। जब वे मिथ्या चीख-पुकार करते हैं, साथ ही वे सारी सीटें नामशूद्रों द्वारा हथिया लेने की संभावना से बेकार में भयभीत हैं। इसके अतिरिक्त बंगाल सरकार के दलित आबादी के आंकड़े लोथियन खंड 2, पृष्ठ 263 के अनुसार 103 लाख हैं जबकि हमने सीटों की गणना के लिए लोथियन के अनुसार 75 लाख माने थे। पूना समझौता लोथियन सिफारिशों के थोड़े समय बाद ही हुआ, देखिए मलिक की टिप्पणी, लोथियन खंड 2, पृष्ठ 25। कलकत्ता में ठक्कर ने हिंदू भावना समझौते के पक्ष में पाई, इसलिए मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित समझौते का पुनरीक्षण नहीं किया जा सकता।
- बिड़ला और ठक्कर
तारीख 26 दिसंबर 1932 का तार
डब्ल्यू.एल.टी. अम्बेडकर इंडियन कांफ्रेंस, लंदन
बंगाल दलित वर्ग पूना समझौते को स्वीकार करते हैं। इसी प्रकार हिंदू परिषद भी हिंदू अभ्यावेदन असद्भावपूर्ण द्वेषपूर्ण-मलिक
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हिंदू महासभा की ओर से डॉ. बी.एस. मुंजे, श्री बी.सी. चटर्जी, श्री जे. बेनर्जी, श्री जी.ए. गवई, राय साहब मेहर चन्द खन्ना, श्री आर.एम. देशमुख, श्री भाई
परमानन्द और पं. नानक चन्द
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः डॉ. मुंजे, मैं आपसे एक-दो सवाल पूछना चाहता हूं। सबसे पहले डॉ. मुंजे उस बैठक के बारे में, जो पं. मदन मोहन मालवीय ने इस पर चर्चा करने के लिए बंबई में बुलाई थी कि उस प्रश्न के संबंध में क्या किया जा सकता है, जो श्री गांधी के अनशन के कारण उत्पन्न हुआ था, माननीय नृपेन्द्र सरकार ने आपसे कुछ प्रश्न पूछे थे, मैं कुछ ब्यौरे प्रकाश में लाने के लिए एक-दो सवाल आपसे पूछना चाहता हूं। आप प्रथम सम्मेलन में उपस्थित थे जो 19 सितंबर 1932 को पं. मालवीय की अध्यक्षता में बंबई में हुआ था।
डॉ. मुंजेः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः जैसा कि आप जानते ही हैं बैठक में एक छोटी-सी उप-समिति नियुक्त की गई थी?
डॉ. मुंजेः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः उसमें दलित वर्गों के और सवर्ण हिंदुओं के प्रतिनिधि थे जिनमें श्री जयकर, माननीय तेज बहादुर सपू्र और अन्य के नाम उल्लेखनीय हैं?
डॉ. मुंजेः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः वह उप-समिति के सवाल पर चर्चा करने के