250 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
रही थी और बातचीत चल रही थी। श्री अम्बेडकर को याद होगा, मैंने कहा था कि जब महात्मा गांधी संयुक्त निर्वाचक-मंडलों में दलित वर्गों को स्थानों का आरक्षण देने के लिए भी तैयार नहीं हैं, तो इस सवाल पर कोई समझौता करना संभव नहीं है, जिससे कि वह अपना अनशन तोड़ सकें। बहरहाल, हमें उस समय बड़ी राहत मिली, जब दूसरे दिन यह समाचार मिला कि महात्मा गांधी संयुक्त निर्वाचक-मंडलों में स्थानों का आरक्षण स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई। तब किसी बैठक में जहां पूना समझौते का सिद्धांत तैयार किया गया था मैंने पं. मालवीय को उस समय साफ बता दिया था कि पूना समझौते का यह सिद्धांत, जो तैयार किया जा रहा है, पृथक-पृथक निर्वाचक-मंडलों पर आधारित है। मुझे व्यक्तिगत तौर पर और हिंदू महासभा को एक संगठन के रूप में पृथक निर्वाचक-मंडलों पर मूलभूत आपत्ति है और मैं व्यक्तिगत तौर पर तथा हिंदू महासभा संस्था के रूप में पूना समझौते के इस सिद्धांत को स्वीकार नहीं करूंगा। इसके बाद यह ठीक है कि मैं बातचीत आगे बढ़ाने के लिए अन्य सदस्यों के साथ पूना नहीं जा सका था। इसके बाद मुझे यह जानकर संतोष हुआ कि महात्मा गांधी स्थानों का आरक्षण स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। मैंने कहा था, गांधी जी के प्राणों का संकट समाप्त हो गया है और इसलिए मैं दिल्ली चला गया। दिल्ली में जब हिंदू महासभा का अधिवेशन चल रहा था, तो मुझे तार मिला कि गांधी जी ने पूना समझौता स्वीकार कर लिया है और स्वभावतः हर कोई गांधी जी के प्राण बचाने के लिए आतुर था और हमने हिंदू महासभा में एक संकल्प पारित किया था।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः समझौते को स्वीकार करते हुए?
डॉ. मुंजेः हां, समझौते को स्वीकार करते हुए। लेकिन यहां यह समझ लिया जाए कि उस समय पंजाब की ओर से राजा नरेन्द्र नाथ ने विरोध प्रदर्शित किया था, जो बेकार गया। निस्संदेह उस समय संपूर्ण सदन का बहुमत भयभीत और आतंकित था।
- श्री जफरुल्ला खांः अनशन के भूत से?
डॉ. मुंजेः यदि समझौता स्वीकार नहीं किया गया, तो महात्मा गांधी के प्राण नहीं बच पाएंगे और इसीलिए उन्होंने समझौता स्वीकार कर लिया। यही वे सब विस्तृत बातें हैं। एक खास मुद्दा यह है कि पहले और दूसरे गोलमेज सम्मेलन के दौरान डॉ. अम्बेडकर से हमारी बातचीत में उन्होंने यह मान लिया है। मैंने हिंदू महासभा के साथ एक करार किया था कि वह पूरी तरह संतुष्ट हैं, यदि संयुक्त निर्वाचक-मंडल की पद्धति के अंतर्गत उन्हें आबादी के आधार पर स्थानों का आरक्षण दे दिया जाए। एक मौके पर दूसरे गोलमेज सम्मेलन के दौरान, जब डॉ. अम्बेडकर ने यह सोचा कि इस मुद्दे में कुछ उलझन है, तो मैंने उन्हें सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री को एक संयुक्त पत्र उनके और मेरे हस्ताक्षर से भेजा जाए और उसमें यह कहा जाए कि दलित वर्गों और हिंदुओं में जो मतभेद हैं, वह इस समझौते से दूर हो गया है, अर्थात् हिंदुओं के साथ संयुक्त निर्वाचक-मंडलों में आबादी के आधार पर स्थानों का आरक्षण।