11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 269

252 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जो अपने आपको हिंदू कहते हैं तथाकथित दलित वर्गों की उन जन-जातियों के खिलाफ एक प्रकार का विद्वेष दर्शित होता है। इसलिए संयुक्त प्रवर समिति से मेरा अनुरोध है कि इस मामले के बारे में विचार किया जाए और कम से कम उन्हें नई जन-जातियों में स्थान दिया जाए।

  1. श्री जफरुल्ला खांः इनका अंतिम मुद्दा साफ नहीं है। क्या ये खास जन-जातियां जिनका आपने जिक्र किया था, अनुसूचीबद्ध होना चाहती हैं?

श्री भाई परमानन्दः हां।

श्री जफरुल्लाः और वे अनुसूचीबद्ध नहीं की गई हैं?

श्री भाई परमानन्दः यह एक दूसरा पहलू है।

  1. श्री जफरुल्ला खांः मैं इस मुद्दे को साफ करना चाहता हूं। ये जातियां उतनी दलित नहीं हैं, जितनी वे जो अनुसूची में रखी गई हैं?

श्री भाई परमानन्दः मेरा मुद्दा यह है कि केवल इसलिए कि वे अपने आपको अनुसूचित जाति के हिंदू कहकर पुकारते हैं, उन्हें इस अधिकार से वंचित किया गया है, जो कि अन्य जनजातियों को दिया गया है।

  1. श्री जफरुल्ला खांः अनुसूची में रखे जाने का अधिकार?

श्री भाई परमानन्दः हां।

डॉ. मुंजेः क्या मैं इस मुद्दे को स्पष्ट कर सकता हूं? जहां तक पंजाब और बंगाल का संबंध है, हिंदू महासभा का आक्षेप है कि सतर्क जांच-पड़ताल के बाद जनता और लोथियन समिति, दोनों के द्वारा यह पाया गया कि पंजाब में दलित वर्गों का प्रश्न विद्यमान नहीं है और बंगाल में दलित वर्गों का प्रश्न इतना ज्वलंत या प्रबल नहीं है कि उस पर बहुत अधिक विचार किया जाना जरूरी हो। यही वह मुद्दा है, जो एक शिकायत बना हुआ है और मेरे मित्र श्री परमानन्द का कहना है कि इन लोगों की यह शिकायत है कि उन्हें दलित वर्गों में इसलिए शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि उन्हें आर्य समाजी बना लिया गया है। मुद्दा यह है कि पंजाब में दलित वर्ग का प्रश्न पृथक निर्वाचक-मंडलों में एक निहित स्वार्थ के रूप में पैदा किया जाना हो, तो इन दलित वर्गों को शामिल किए जाने का अधिकार है, जिन्हें अब दलित वर्गों के रूप में अनुसूची में रखा जा रहा है। यदि वह निहित स्वार्थ पैदा नहीं किया जाना है, तो उन लोगों का उन दलित वर्गों में शामिल किए जाने का कोई दावा नहीं है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या मैं एक प्रश्न पूछ सकता हूं, आप पूना समझौते को पंजाब में लागू करने में इसलिए आपत्ति करते हैं, क्योंकि आपकी राय में वहां कोई दलित वर्ग नहीं है?

श्री भाई परमानन्दः उस अर्थ में नहीं जिसमें अन्य अधिकांश प्रांतों में हैं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः किसी भी अर्थ में हैं अथवा नहीं? पंजाब में दलित