11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 270

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

वर्ग हैं अथवा नहीं?

253

श्री भाई परमानन्दः वे अछूत नहीं हैं, वे अगम्य नहीं हैं, कोई भेदभाव नहीं समझा जाता। अभी साइमन कमीशन की रिपोर्ट और भारत सरकार की रिपोर्ट में भी यह कहा गया है कि पंजाब में सवर्ण हिंदुओं और दलित वर्गों में कोई अन्तर नहीं है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या मैं आपसे एक सवाल पूछ सकता हूं, आप अपने आपको कैसे संतुष्ट करते हैं? आपकी पहली स्थिति यह है कि कोई दलित वर्ग नहीं है और इसलिए उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं है और आपकी दूसरी शिकायत यह है कि कुछ दलित जातियों को अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है?

पं. नानक चन्दः इस मुद्दे से मेरा संबंध रहा है और मैं इसके बारे में स्पष्टीकरण दूंगा। जहां तक अगम्यता, अस्पृश्यता का प्रश्न है, वहां यह सब नहीं है और यदि है तो प्रायः नगण्य_ बहुत कम। यह सरकारी पदाधिकारियों, सिखों, मुसलमानों और हिंदुओं द्वारा स्वीकार किया गया है। किन्तु कुछ वर्ग दलित वर्ग के रूप में अनुसूची में रखे गए हैं और वैसी ही परिस्थिति के कुछ अन्य चाहे वे आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए हों या अन्यथा जो कुछ अधिकारों से जैसे जमीन खरीदने के अधिकारों से वंचित अन्य लोगों के साथ अनुसूची में शामिल होने चाहिए थे, क्योंकि उनकी भी वही सामाजिक स्थिति है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आप बहुत चिंतित हैं कि उन्हें शामिल किया जाना चाहिए?

पं. नानक चन्दः मैं चिंतित नहीं हूं, वे चिंतित हैं। मैं नहीं चाहता कि कोई भी दलित वर्ग कहा जाए।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं कुछ सवाल बंगाल के बारे में श्री चटर्जी से करना चाहता हूं। मेरे विचार में आपकी मुख्य शिकायत यह है कि जब पूना समझौता किया गया था, तो उसमें हिंदुओं का प्रतिनिधित्व नहीं हुआ था। यही है न?

श्री बी.सी. चटर्जीः यह तो अनेक शिकायतों में से एक है। मेरी मुख्य शिकायत है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः फिलहाल मैं इसे सुनूंगा, क्योंकि मैं चाहता हूं कि एक बार शिकायत समाप्त हो जाए। मैं समझता हूं कि आपके सहयोगी ने यह स्वीकार किया था कि बंगाल के सवर्ण हिंदुओं के सदस्य बंबई और पूना, दोनों में उपस्थित थे।

श्री बी.सी. चटर्जीः हां।

श्री जे. बनर्जीः पूना में एक सवर्ण हिंदू उपस्थित था। मैंने यही कहा था।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या अन्य प्रांतों से दर्जनों नहीं आए थे?

श्री बी.सी. चटर्जीः हो सकता है।

मारक्वेस ऑफ जैटलैंडः डॉ. भीमराव अम्बेडकर, यदि आप हमें बंगाल के उन सवर्ण हिंदुओं के नाम बता दें जो वहां थे, तो यह पूरी समस्या हल हो सकती है?