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पूर्ण सम्मेलन की समिति
उप-समिति संख्या 1 (संघीय संरचना) के अंतरिम प्रतिवेदन
पर टिप्पणियांऽ - 16 दिसंबर, 1930
डॉ. अम्बेडकर [] ः मेरे मित्र श्री जोशी ने बैठक स्थगित होने से पहले जो मुद्दा रखा था, मैं उसे उठाना चाहता हूं। इस उप-समिति के सभापति के रूप में लॉर्ड चांसलर ने कुछ सदस्यों को इन बातों पर अपने विचार पेश करने के लिए आमंत्रित किया था और मुझ सहित कुछ सदस्यों ने उप-समिति के सभापति को एक पत्र भेजा था, जिसमें यह इच्छा व्यक्त की गई थी कि इस पत्र को उप-समिति के विचारार्थ रखा जाए। मुझे इस प्रतिवेदन में उस पत्र का कहीं कोई उल्लेख नहीं मिला और लॉर्ड सेंकी ने मुझे सूचित किया है कि पत्र को उप-समिति के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया, बल्कि, महोदय, उसे प्रधानमंत्री के रूप में आपके पास भेज दिया गया है। मेरे विचार से ऐसा करना उचित नहीं था। यह पत्र उप-समति के सभापति को उप-समिति के प्रयोग के लिए भेजा गया था और इसमें संघ के प्रश्न पर हमारे कुछ निश्चित विचारों को व्यक्त किया गया था। मुझे यह बात कहने के लिए बाध्य होना पड़ा है, क्योंकि मेरे विचार से यह प्रतिवेदन जिस प्रकार से तैयार किया गया है, वह पत्र में व्यक्त सिद्धांतों के एकदम विपरीत है। हमें बाद में किसी समय इस प्रश्न पर पूरी चर्चा करवानी होगी और मैं जानना चाहता हूं कि लॉर्ड चांसलर इस संबंध में क्या कदम उठाना चाहते हैं?
लॉर्ड सेंकीः मैं डॉ. अम्बेडकर का आभारी हूं कि उन्होंने यह मुद्दा उठाया, क्योंकि मैं भी इस मुद्दे को उठाना चाहता था। इससे मुझे अपनी बात कहने का अवसर मिल गया है। मुझे यह बात आरंभ में ही कह देनी चाहिए थी। ख्. . ., इस बारे में यह पूरी तस्वीर नहीं है ख्. . ., शीघ्र ही आपको पूरी वस्तु, स्थिति से अवगत कराया जाएगा। डॉ. अम्बेडकर,
ऽ डॉ. अम्बेडकर इस उप-समिति के सदस्य नहीं थे। किन्तु उन्हें दूसरे गोलमेज सम्मेलन में संघीय संरचना प्रोसीडिंग्स ऑफ दि राउंड टेबिल कांफ्रेंस, पृ. 193-95
संबंधी समिति के सदस्य के रूप में सम्मिलित किया गया था।