11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 272

भारतीय संवैधानिक सुधार समिति

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श्री जे. बनर्जीः हां।

  1. श्री एम.आर. जयकरः उन कार्यवाहियों के प्रकाशन के बाद से कोई खंडन हुआ है?

श्री जे. बनर्जीः हां, बहस के तुरन्त बाद ज्यों ही हमने सुना कि कुछ नाम पढ़े गए हैं, अखबारों में खंडन जारी किया गया।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं आपसे पूछता हूं कि क्या वे लोग बंबई में उपस्थित नहीं थे?

श्री जे. बनर्जीः मैं पूना की बात कर रहा हूं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं सबसे पहले बंबई की बात कर रहा हूं। ये लोग बंबई में उपस्थित ही नहीं थे, जब उप-समिति नियुक्त की गई थी, बल्कि उन्होंने मेरे कार्यालय में मुझसे अलग-अलग बात की थी और समझौता करने का आग्रह किया था। यह एक तथ्य है, जिसे मैंने साक्षात्कार में व्यक्त किया था जो मैंने बॉम्बे टाइम्स को दिया था और जो आपकी विधायी कार्यवाहियों की घोषणा के शीघ्र बाद 17 मार्च को प्रकाशित हुआ?

श्री जे. बनर्जीः अगले ही दिन मैंने आपके कथन का खंडन किया था और कहा था कि इसमें मुद्दे को नहीं छुआ गया है, क्योंकि उनमें से तीन सदस्य जैसा कि आपने स्वयं माना है, पूना नहीं गए थे और समझौते के समय उपस्थित नहीं थे।

श्री बी.सी. चटर्जीः मैं केवल यह कहना चाहता हूं कि यह किसी का भी पक्ष नहीं है और मैं नहीं समझता कि यह डॉ. अम्बेडकर का पक्ष है कि वे सज्जन बंबई से भेजे गए थे, अथवा वे अकेले पूना में उपस्थित थे, बंगाली हिंदुओं की ओर से या बंगाली हिंदुओं में से किसी के द्वारा भेजे गए थे, हो सकता है, वे वहां अचानक पहुंच गए हों या वे वहां इसलिए हो कि वे बीमार महात्मा को देखना चाहते थे। वास्तव में कुछ लोग वहां गांधी की शव यात्रा में अर्थी को कंधा देने का गौरव पाने के लिए गए थे।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं आपसे यह पूछूंगा कि क्या यह सर्वविदित था कि ये लोग मालवीय सम्मेलन में भाग लेने प्रकट प्रयोजन से कलकत्ता से चले थे। यह लिबर्टी में छपा है?

श्री जे. बनर्जीः वे बंगाल के किसी सार्वजनिक संगठन द्वारा अधिकृत होकर वहां नहीं गए थे। हो सकता है कि वे निजी काम से अथवा किसी अन्य कारण से गए हों। क्या मैं डॉ. अम्बेडकर के सामने यह प्रस्ताव रख सकता हूं। हम बंगाल के लोग इसे बहुत बड़ा कलंक मानते हैं कि यह सुझाव दिया जाए कि बंगाल में दलित वर्ग हैं। बंगाली हिंदू जात-पांत निषेध के लिए और इसी प्रकार के काम करने के लिए सदियों से सामाजिक कार्य करते चले आ रहे हैं। डॉ. अम्बेडकर इससे सहमत होंगे। दलित वर्ग कौन हैं, यह तय करने के लिए लोथियन समिति ने बहुत उचित ढंग से दो कसौटियां