11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 273

256 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

निर्धारित की थीं। अस्पृश्यता कुछ दूरी के भीतर अगम्यता थी। मेरा सुझाव है कि बंगाल सरकार को इस बारे में जांच करनी चाहिए कि कौन अस्पृश्य है और अगम्य है। और यदि उनकी संख्या निश्चित हो जाए तो हम संयुक्त निर्वाचक-मंडल के आधार पर बंगाल विधान परिषद में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए तैयार हैं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं संयुक्त निर्वाचक-मंडल की चर्चा नहीं कर रहा हूंः मैं तथ्य संबंधी इस महत्त्वपूर्ण मुद्दे की चर्चा कर रहा हूं कि जब यह सर्वविदित था कि कुछ सवर्ण हिंदू बंगाली मालवीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए बंबई आ रहे हैं, लिबर्टी के 17 सितंबर 1942 के अंक से आपके सामने उद्धृत कर रहा हूं। यह अखबार कलकत्ता में छपता है। उस तारीख के अंक के पृष्ठ 5 पर स्तम्भ 4 में मोटी सुर्खियों में यह रिपोर्ट छपी है, ‘स्वामी सत्यानन्द और अन्य बंबई के लिए रवाना। अमृत समाज के सर्व श्री हरिदास मजूमदार और जनेश्वर मंडल मालवीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए आज बंबई रवाना हो रहे हैं।’ वे अपने निजी काम से वहां नहीं जा रहे थे?

श्री बी.सी. चटर्जीः जहां तक मेरा संबंध है, मैंने उन सज्जनों के बारे में कभी नहीं सुना। मैं उनके बारे में पहली बार सुन रहा हूं। निश्चय ही जहां तक बंगाल का संबंध है, वे अपनी ज्योति एक पुंज के भीतर छिपाए हुए हैं और इन सज्जनों ने यह प्रचार करने के लिए रिपोर्ट भेजी - कि वे जा रहे हैं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मेरा मुद्दा यह है कि बंगाल की जनता को मालूम था कि सवर्ण हिंदुओं के कुछ सदस्य मालवीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए बंगाल से रवाना हो रहे हैं और यदि बंगाल की जनता यह सोचती थी कि वे उनके प्रतिनिधि नहीं हैं, तो उनके लिए यह बहुत संभव था कि वे मालवीय के पास संदेश भेजते कि इन लोगों पर भरोसा न किया जाए?

श्री बी.सी. चटर्जीः मेरा निवेदन है कि बंगाल की जनता के साथ यह अत्यन्त अनुचित बात होगी कि उन्हें एक ऐसी बात के साथ जोड़ दिया जाए जो लिबर्टी के किसी स्तम्भ में सरसरी तौर पर छापी गई थी।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं केवल तथ्य के रूप में बता रहा हूं कि बंगाल के प्रत्येक आदमी को यह जानना चाहिए।

श्री बी.सी. चटर्जीः कोई भी अखबार को इतनी गंभीरता से नहीं पढ़ता, कोई भी इस तरह की चीजें ढूंढने के लिए खास स्तम्भों को नहीं ढूंढता। हमारी जानकारी में यह बात कभी नहीं आई।

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं आपसे इस पर और आग्रह नहीं करूंगा।

  1. माननीय आस्टिन चेम्बरलेनः क्या श्री चटर्जी का अभिप्राय है कि उन्हें यह ज्ञात नहीं था कि बंबई में ऐसी कोई बैठक हो रही है?

श्री बी.सी. चटर्जीः हमें ज्ञात था कि बैठक हो रही है, किन्तु हम इस बात से पूरी