भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
तरह अनभिज्ञ थे कि कोई अपनी तरफ से उस बैठक में बंगाल से जा रहा है।
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- माननीय आस्टिन चेम्बरलेनः यदि आप इस विषय में इतनी प्रबल भावनाएं रखते थे और आपकी राय में संगठन में आपके सबसे अधिक प्रतिनिधि थे, जो उन लोगों की ओर से बोल सकते थे, जो आपकी विचारधारा के थे, तो आपने उस समय प्रतिनिधि क्यों नहीं भेजे, जब आपको बैठक की जानकारी मिल गई थी?
श्री बी.सी. चटर्जीः हमें नहीं पता था कि वहां क्या हो रहा है? ईमानदारी से कलकत्ता में हमें नहीं मालूम था कि वहां क्या हो रहा है। हमने केवल यह खबर सुनी थी कि श्री गांधी अनशन करने जा रहे हैं।
श्री जे. बनर्जीः हमने इसे बहुत महत्त्व नहीं दिया। मालवीय सम्मेलन बंगाल के सवर्ण हिन्दुओं का भाग्य विधाता नहीं था, इसलिए मैं किसी भी हैसियत में वहां नहीं गया। पूना बैठक वास्तव में महत्त्वपूर्ण थी।
- माननीय आस्टिन चेम्बरलेनः आपको बैठक की जानकारी थी, लेकिन आपने उसे भाग लेने लायक नहीं समझा। यही है न?
श्री जे. बनर्जीः मुझे खेद है कि आप बंबई और पूना की दो बैठकों में भ्रान्ति कर रहे हैं। समझौते पर पूना में हस्ताक्षर हुए थे और वह यह महत्त्वपूर्ण बैठक थी, जिसमें सवर्ण हिंदुओं को नहीं बुलाया गया था। बंबई की बैठक एक प्रकार का प्रारंभिक कदम था। हमारे द्वारा कोई बहुत महत्त्व न दिया जाना औचित्यपूर्ण था।
- श्री जफरुल्ला खांः क्या मैं आपसे यह पूछ सकता हूं? श्री चटर्जी, मैं आपको किसी भी तरह नाराज करना नहीं चाहता, लेकिन ऐसा लगता है कि कदाचित बंगाल के सवर्ण हिंदुओं का दृष्टिकोण था, ‘हमारा कोई सरोकार नहीं है’, कदाचित इससे कुछ लाभ नहीं होगा, यदि इनमें महात्मा जी के प्राण बचा दिए तो बहुत है, यदि किसी भी तरह से हम प्रभावित हुए, तो हम बाद में उसका खंडन कर सकते हैं।’
श्री बी.सी. चटर्जीः अत्यंत आदरपूर्वक कहता हूं कि ऐसी बात नहीं है। मुझे प्रांतीय मताधिकार समिति में शामिल होने का सम्मान प्राप्त हुआ था और मुझे लोथियन समिति से सहयोग करने का मौका मिला था। हमने गहराई से इस बात की छानबीन की थी कि अछूत कौन हैं? हमारी छानबीन में यही सारी बातें हैं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आप मेरे मुद्दे से दूर जा रहे हैं। बंबई और पूना में क्या हुआ, इसकी रिपोर्ट हर रोज लिबर्टी में नियमित रूप से पूरी तरह छपती थी। क्या आप इसका खंडन करने के लिए तैयार हैं?
श्री बी.सी. चटर्जीः मुझे अफसोस है कि मैंने लिबर्टी कभी नहीं पढ़ा।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं लिबर्टी लाया था। मैं सोच-समझकर स्टेट्समैन नहीं लाया, क्योंकि आप कहेंगे कि वह एंग्लो-इंडियन पेपर है।