260 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री बी.सी. चटर्जीः मेरा उत्तर यह है कि उन्होंने यह नहीं समझा था कि समझौते के परिणाम क्या होंगे, और अब ये एकमत होकर उसकी निन्दा कर रहे हैं।
श्री भाई परमानन्दः क्या इस मुद्दे को मैं स्पष्ट करूं?
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं नहीं समझ पाता कि किसी स्पष्टीकरण की जरूरत है। ये विधान सभा के सदस्य हैं और उन्होंने कोई विरोध नहीं किया। सितंबर 1932 में समझौते के बाद बंगाल प्रांत में ही विरोधों के संबंध में नवंबर 1932 में बंगाल विधान परिषद का एक सत्र हुआ था।
श्री बी.सी. चटर्जीः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः बंगालियों ने पूना समझौता लागू करने का विरोध करते हुए परिषद में कोई औपचारिक संकल्प पेश नहीं किया था?
श्री बी.सी. चटर्जीः नहीं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं रिपोर्ट की बात कर रहा हूं।
श्री बी.सी. चटर्जीः इस प्रश्न का उत्तर मैं दूंगा। पहली बात जो हमने की थी, वह यह थी कि परिषद के अधिवेशन के अल्पकाल के भीतर ही परिषद ने सभी प्रभावशाली हिंदू सदस्यों को एकत्र किया और हमने यह निश्चय किया कि हमें संयुक्त रूप से ...।
- श्री भीमराव अम्बेडकरः क्या आप मेरे सवाल का उत्तर देंगे, तभी हम स्पष्टीकरण पर आ सकते हैं। मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या नवंबर वाले सत्र में बंगाल विधान परिषद में कोई औपचारिक संकल्प पेश किया गया था। वह सत्र पूना समझौते की स्वीकृति के तुरन्त बाद औपचारिक रूप से उसका विरोध करते हुए किया गया था। मैं यही जानना चाहता हूं, क्या कोई संकल्प था?
श्री बी.सी. चटर्जीः निस्संदेह मैंने नवंबर के सत्र में पूना समझौते का विरोध करते हुए एक संकल्प रखा था। किन्तु नामशूद्रों के एक विद्वान श्री रसिक विश्वास और पं. मालवीय के संयुक्त बयानों के कारण वह वापस लेना पड़ा, किन्तु दोनों ने मुझे यह आश्वासन दिया था कि वे डॉ. अम्बेडकर से एक दूसरी बैठक करवाकर उन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए पूना समझौते का पुनरीक्षण करवा लेंगे, जो उनके सामने रखे गए हैं और उन्होंने मुझे बार-बार अनुरोध किया कि मैं उन्हें यह अवसर दिए बिना परिषद में मत विभाजन पर जोर न दूं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या वह रखा गया था?
श्री बी.सी. चटर्जीः उन्होंने इसे इस आधार पर वापस लेने के लिए मुझे फुसलाया था।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या वह रखा नहीं गया था?
श्री बी.सी. चटर्जीः मैंने उसे वापस ले लिया था।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या वह रखा नहीं गया था?