भारतीय संवैधानिक सुधार समिति
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श्री बी.सी. चटर्जीः मैंने कहा न कि मैंने उसे वापस ले लिया था।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या आपने उसका नोटिस दिया था?
श्री बी.सी. चटर्जीः मैंने उसका नोटिस दिया था और श्री रसिक विश्वास और पं. मालवीय के कहने पर मैंने उसे वापस ले लिया था, उसे पेश नहीं किया था।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः सन् 1933 के मार्च सत्र में जिस प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी, वह एक विशेष प्रस्ताव था। श्री शांति शेंखरेश्वर रे के नाम से, जो साधारण प्रस्ताव था, वह पेश नहीं हुआ था?
श्री जे. बनर्जीः वह पहुंच नहीं सका था।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः उसके लिए कोई वरीयता नहीं मांगी गई थी?
श्री जे. बनर्जीः वरीयता मांगी गई थी, लेकिन प्राप्त नहीं की जा सकी थी। उस पर चर्चा करने के लिए समय नहीं था। बाद में मैंने एक विशेष संकल्प पेश किया था।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः बंगाल विधान परिषद में मार्च 1932 के सत्र में उस संकल्प के पारित किए जाने के एक महीने बाद 21 अप्रैल 1933 को कलकत्ता के एल्बर्ट हाल में एक सार्वजनिक सभा हुई थी। उसकी अध्यक्षता श्री सामल ने की थी और उस सभा ने पूना समझौते का विरोध करके बंगाल विधान परिषद के दृष्टिकोण की निन्दा में एक संकल्प पारित किया था?
श्री जे. बनर्जीः हो सकता है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः उस समिति की कार्यवाहियां 22 अप्रैल 1933 के लिबर्टी के अंक में पूर्ण रूप से प्रकाशित हैं। क्या यह तथ्य है, अथवा नहीं?
श्री बी.सी. चटर्जीः बहुत संभव है। मुझे स्वयं नहीं पता। मैं इंग्लैंड में था।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आपने कहा कि पूना समझौते के समय बंगाल सरकार दार्जीलिंग में थी और किसी हिन्दू से परामर्श नहीं किया गया था। आपने यह माननीय नृपेन्द सरकार को दिए उत्तर में कहा था?
श्री बी.सी. चटर्जीः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या आप बताएंगे कि सितंबर 1903 में बंगाल कार्यपालिका का गठन किया गया था? उसके सदस्य कौन थे और उसकी सांप्रदायिक संरचना क्या थी?
श्री जे. बनर्जीः बंगाल सरकार में तीन बंगाली सदस्य नहीं, दो बंगाली हिंदू सदस्य थे।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या आपका यह कहना है कि बंगाल सरकार ने जिसमें दो बंगाली सवर्ण हिंदू सदस्य थे, पूना समझौते का अनुमोदन नहीं किया था?
श्री जे. बनर्जीः मुझे सरकार के बारे में कुछ नहीं करना। लेकिन मुझे पक्का विश्वास है कि सरकार के दोनों हिन्दू सदस्यों ने उसे अनुमोदित नहीं किया था और