262 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उसका जोरदार शब्दों में विरोध किया था।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः केंद्रीय कार्यपालिका के संबंध में आपने कहा है कि उसमें एक बंगाली हिंदू था। माननीय मित्तर, क्या ऐसा है?
श्री जे. बनर्जीः हां। मैं श्री बी.एल. मित्तर के बारे में कुछ नहीं कह सकता। लेकिन मैं आपसे कहूंगा कि आप वायसराय की कार्यकारी परिषद के वर्तमान सदस्य से पता करें?
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः पूछताछ के दौरान माननीय नृपेन्द्र सरकार ने यह सुझाव दिया है कि महामहिम ने यह सारी बात महात्मा गांधी के अनशन से उत्पन्न एक प्रकार के आपात स्थिति में स्वीकार की थी। मैं आपसे जो पूछना चाहता हूं वह है, क्या यह सच नहीं है कि सरकार को महात्मा गांधी द्वारा लिखा गया पहला पत्र 18 अगस्त का नहीं था, बल्कि 11 मार्च 1932 का था (वह पत्र माननीय सैमुअल होर को संबोधित है), यह वस्तुतः इससे पांच महीने पहले का है। जिस पत्र का उल्लेख माननीय नृपेन्द्र सरकार ने किया है और उनका कहना है, अर्थात् यह सांप्रदायिक निर्णय दिए जाने से पहले की बात है। यही मेरा मुद्दा है। उनका वक्तव्य इस प्रकार है, ‘माननीय सैमुअल कदाचित आपको स्मरण होगा कि गोलमेज सम्मेलन में मेरे भाषण के अंत में जब अल्पसंख्यकों का दावा प्रस्तुत किया गया, तो मैंने कहा था कि मैं अपने प्राणों की बाजी लगाकर दलित वर्गों को पृथक निर्वाचक-मंडल देने का विरोध करूंगा। यह क्षणिक आवेश में या किसी अलंकारिक भाषा में नहीं कहा गया था। यह गंभीर वक्तव्य के रूप में कहा गया था’, आदि। इसके बाद उनका कहना है, ‘अतः मुझे आदरपूर्वक महामहिम की सरकार को यह सूचित करना है कि यदि उन्होंने दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक-मंडल बनाने का फैसला लिया, तो मैं आमरण अनशन करूंगा।’ अनशन की धमकी सांप्रदायिक फैसला दिए जाने के बाद 18 अगस्त के पत्र में नहीं दी थी, बल्कि 11 मार्च 1932 के पत्र में दी गई थी।
श्री जे. बनर्जीः बिल्कुल ठीक।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः और महामहिम की सरकार ने 11 मार्च के पत्र में दी गई, इस धमकी के बावजूद दलित वर्गों को पृथक निर्वाचक-मंडल दे दिया?
श्री जे. बनर्जीः समझौते के खिलाफ हमारी शिकायत है कि यह पृथक निर्वाचक-मंडल की प्रत्येक बुराई को स्थायित्व प्रदान करता है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यह दूसरी बात है। बेहतर होगा कि यह आप श्री गांधी से कहें, मैं इस पर चर्चा नहीं कर सकता।
श्री जे. बनर्जीः हमें महामहिम की सरकार का निर्णय पूना समझौते से कहीं ज्यादा स्वीकार्य है।