11. भारतीय संवैधानिक सुधार विषयक संयुक्त समिति के समक्ष लिया गया साक्ष्य - Page 281

264 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री जे. बनर्जीः हो सकता है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मालदा में बंगाल प्रांतीय हिंदू सम्मेलन के सातवें अधिवेशन में?

श्री जे. बनर्जीः हो सकता है, मुझे नहीं पता। मुझे व्यक्तिगत जानकारी नहीं है।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं आपके सामने एक प्रस्ताव पढ़ना चाहता हूं, जो बंगाल प्रांतीय हिंदू सम्मेलन में पारित किया गया था और 19 सितंबर 1932 के लिबर्टी में छपा था, ‘यह सम्मेलन तथाकथित दलित वर्गों से अपील करता है कि वे आगामी संविधान में पृथक निर्वाचक-मंडलों के आधार पर प्रतिनिधित्व की मांग न करें और राजा मुंजे समझौते के पालन की पुष्टि करते हैं और दलित वर्गों को संयुक्त निर्वाचक-मंडल के माध्यम से उनकी आबादी के अनुसार प्रतिनिधित्व देने की बात मानने के लिए तैयार हैं, भले ही इसका तात्पर्य यह हो कि हिंदुओं को आवंटित अधिकांश स्थान उन्हें दे देने पड़ें।’

श्री मुंजेः क्या मैं इस सवाल का उत्तर दे सकता हूं? प्रस्ताव पारित किया गया था। हम उस पर अटल हैं और मेरे मित्र श्री चटर्जी ने डॉ. अम्बेडकर के सामने एक मनोरंजक पेशकश की थी। क्या वह यह देखने के लिए तैयार हैं कि आबादी के आधार पर संख्या कितनी होगी, दलित वर्गों को अछूत और अगम्य के रूप में परिभाषित किया गया है। हम डॉ. अम्बेडकर के समक्ष यही पेशकश करने के लिए तैयार हैं और इस पूरे सवाल का फैसला बंगाल और पंजाब में किया जाए कि दलित वर्ग की परिभाषा के अनुसार उनकी संख्या कितनी है, उस परिभाषा के अनुसार दलित वर्ग के सदस्य वे हैं, जो अस्पृश्य या अगम्य हैं। हम यह खुली पेशकश करते हैं।

डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं अपने लोगों के भाग्य को दलगत राजनीति का खेल बनाना नहीं चाहता और मुझे खेद है कि मैं इस पेशकश को स्वीकार नहीं कर सकता।

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  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरऽः क्या मैं एक अनुपूरक प्रश्न पूछ सकता हूं? क्या मैं यह समझूं कि आप दलित वर्गों को भी अपनी हिंदू महासभा में शामिल करते हैं? क्या आप उनका प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं?

डॉ. मुंजेः मेरी दलील है कि मैं दलित वर्गों का भी प्रतिनिधित्व करता हूं और मेरे मित्र श्री गवई जो मेरे पास बैठे हैं, हिंदू महासभा के शिष्ट मंडल में दलित वर्गों के प्रतिनिधि हैं तथा यह कभी साबित नहीं हुआ है कि क्या मैं बहुसंख्यक का प्रतिनिधित्व करता हूं अथवा क्या श्री गवई दलित वर्गों में बहुसंख्यक का प्रतिनिधित्व करते हैं।

  1. डॉ. भीमराव अम्बेडकरः यह एक भिन्न बात है। मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या आप दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

ऽ मिनिट्स ऑफ एविडेंस, खंड 2-ग, 2 अगस्त 1933, पृ. 1605-08