266 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हैं, जिसे हम उचित शब्दों में अधिनियम की धारा में रख सकें।
श्री एम.के. आचार्यः इसीलिए मैंने कहा था। अब डॉ. अम्बेडकर चंद शब्दों में उत्तर देने के लिए मेरे पीछे पड़े हैं, तो मैं नहीं दे सकता।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः मैं आपके पीछे पड़ने की कोशिश नहीं कर रहा हूं। मैं समझने की कोशिश कर रहा हूं। विधायी प्रयोजनों के लिए आप समिति को कोई फार्मूला दें, जिसे अधिनियम में रखा जा सके, ताकि सदन के स्पीकर अथवा गवर्नर अथवा उसके लिए, जो भी विनिश्चय करने वाला प्राधिकारी हो और न्यायालयों के लिए निश्चित रूप से यह देखना संभव होगा कि क्या विधान-मंडल द्वारा पारित विशेष कानून उस विधान-मंडल के अधिकार से परे है या नहीं?
श्री एम.के. आचार्यः मेरा विचार था कि मैंने एक फार्मूला दे दिया है, जो अत्यंत व्यावहारिक है और जो मैंने वास्तव में किसी से लिया है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आपने केवल इतना कहा था कि वे मूल तत्त्व हैं। आपने सारा मामला अनिर्णीत छोड़ दिया था। वे मूल तत्त्व क्या हैं?
श्री एम.के. आचार्यः मैंने जो फार्मूला सुझाया था, वह था, धर्म को प्रभावित करने वाले कानून को सदन में पेश किए जाने से पहले गवर्नर या गवर्नर जनरल उस पर उस प्रांत में मान्यता प्राप्त मठाधीशों की राय ले और उसके बाद, तथा संभवतः उनकी राय के अनुसार उसमें परिवर्तन करने के बाद उसे पेश किया जा सकता है और इसका फैसला करना गवर्नर या गवर्नर जनरल का काम है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः क्या इससे मैं यह समझूं कि कोई कानून आपके धर्म के मूल तत्त्वों को प्रभावित करता है या नहीं यह एक ऐसा विषय है, जिसका निश्चय धार्मिक मठाधीश करेंगे?
श्री एम.के. आचार्यः निश्चय ही ऐसा है। वही फैसले के लिए सक्षम निर्णायक हैं।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः श्री आचार्य, आप जाति से ब्राह्मण हैं?
श्री एम.के. आचार्यः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः श्री देशपांडे, आप जाति से ब्राह्मण हैं?
श्री देशपांडेः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः श्री बनर्जी, क्या आप जाति से ब्राह्मण हैं?
श्री जे. बनर्जीः हां।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः श्री आचार्य, क्या यह एक तथ्य नहीं है कि हिंदू धर्म में कोई भी, जो जन्म से ब्राह्मण नहीं है, वह पुजारी नहीं हो सकता।
श्री एम.के. आचार्यः यह सच नहीं है।
- डॉ. भीमराव अम्बेडकरः आपका मतलब है कोई भी हिंदू व्यवहार में किसी भी हिंदू समारोह में पुजारी का कार्य कर सकता है?